राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 5 सितंबर।श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि पाप कर्मों का साथ देने वाले आपको कई मिल जाएंगे किंतु आत्म कल्याण का मार्ग बताने वाले या उस मार्ग पर आपका साथ देने वाले बहुत ही कम लोग मिलेंगे। उन्होंने कहा कि आत्म कल्याण के मार्ग में बढ़ने के लिए हमें खुद ही पुरुषार्थ करना होगा।
जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने जैन बगीचा स्थित उपाश्रय भवन में आज अपने नियमित प्रवचन में कहा कि वर्तमान समय ही हमारे हाथ में है। भूतकाल तो निकल गया और उसे वापस भी नहीं लाया जा सकता।
भविष्य काल को सुधारा जा सकता है लेकिन इसके लिए वर्तमान काल में पुरुषार्थ करना होगा। हमें समय का सदुपयोग करना होगा। जो समय चला गया उसके लिए अफसोस ना करें, वह लौटकर नहीं आने वाला। जो समय चला गया उस पर ध्यान ना दो और जो बचा है, उसे नष्ट ना करो।
जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि आप अपने को देखो। संकट के समय आप अकेले रह जाओगे। समय को पहचान नहीं पाओगे तो आपको बहुत दुख होगा, लेकिन वह समय वापस नहीं आ पाएगा।
अपने मन की गांठ को खोलने के लिए परमात्मा ने जो मार्ग बताया है, उसका अनुकरण करें और मन की गांठ खोलकर आत्म कल्याण के मार्ग में आगे बढ़ें। यह जानकारी विमल हाजरा ने दी।

