राजनांदगांव (अमर छत्तीसगढ) 13 सितंबर। 12 सितंबर शुक्रवार को मूर्धन्य साहित्यकार डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र की 127 वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित परिसंवाद मे उपरोक्त उद्गार डॉ. शंकर मुनि राय ने मुख्य अतिथि की आसंदी से व्यक्त किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रख्यात पत्रकार एवं साहित्यकार गिरीश पंकज ने कहा कि – मिश्र जी तीन महाकाव्यों की रचना करने वाले एकमात्र साहित्यकार हैं।
कान्यकुब्ज सभा राजनांदगांव एवं नांदगांव साहित्य एवं संस्कृति परिषद द्वारा मिश्र जी की 127 वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर सुबह त्रिवेणी परिसर में डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र, डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी एवं श्री गजानन माधव मुक्तिबोध की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पत की गई जिसमें मुख्य अतिथि महापौर श्री मुधसूदन यादव थे। महापौर मधुसूदन यादव ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि राजनांदगांव की धरती की पहचान डॉक्टर मिश्र जैसे साहित्यकारों से हुई है ।डॉ शंकर मुनिराय विभागाध्यक्ष हिंदी शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय राजनंदगांव ने डॉक्टर मिश्र के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। एम आई सी के अध्यक्ष राजा माखीजा संतोष पिल्लई नेता प्रतिपक्ष नगर निगम राजनंदगांव के साथ त्रिवेणी परिसर में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
Pदोपहर में डॉक्टर बलदेव प्रसाद मिश्र हायर सेकेंडरी स्कूल में मिश्र जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके पश्चात् अतिथियों के संक्षिप्त उद्बोधन के पश्चात् विद्यार्थियों की वाद विवाद, भाषण एवं कवितापाठ प्रतियोगिताओं के पुरस्कार प्रदान किये गये।
पुरस्कार मिश्र जी की पुण्य स्मृति में प्रदीप मिश्रा के सौजन्य से प्रदान किये गये। इस अवसर पर प्रो. आर. पी. दीक्षित, प्रदीप कुमार मिश्रा, अजय शुक्ला, प्राचार्य भूपेश साहू, शिक्षकगण श्री देवांगन, ठाकुर, सुश्री रावत एवं सुश्री मेश्राम एन. सी. सी. अधिकारी श्री चंदू चंद्राकर, छात्रगण सुनील, चुनेन्द्र एवं प्रीती, आदि ने सक्रिय भागीदारी कर कार्यक्रम को सफल बनाया।
संध्या 6.00 बजे कान्यकुब्ज सभा राजनांदगांव एवं नांदगांव साहित्य एवं संस्कृति परिषद के संयुक्त तत्वावधान में ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता डॉक्टर शंकर मुनि राय ने मिश्र को राम काव्य परंपरा का श्रेष्ठ साहित्यकार निरूपित किया किंतु उन्हें साहित्य जगत में वह स्थान प्राप्त नहीं हुआ जिसके वास्तव में हकदार थे।
गिरीश पंकज वरिष्ठ साहित्यकार रायपुर ने डॉक्टर मिश्र के विभिन्न ग्रंथ एवं काव्य खंडों की विवेचना की तथा यह भी बताया कि वह एकमात्र साहित्यकार हैं जिन्होंने तीन महाकाव्य की रचना की ।
डॉ नीलम तिवारी ने कहा वह मात्र मानस मर्मज्ञ ही नहीं थे वरन साहित्य, शिक्षा, प्रशासन. राजनीति, लोक सेवा जैसे सभी क्षेत्रों को श्रेष्ठता से निभाया है। सिडनी ऑस्ट्रेलिया से आए मृणाल शर्मा ने मिश्र जी के महाकाव्य साकेत संत के कुछ अंश का सस्वर काव्य पाठ किया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉक्टर चंद्रशेखर शर्मा प्राचार्य छत्रपति शिवाजी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दुर्ग ने किया अंत मे आभार प्रदर्शन प्रदीप मिश्रा अध्यक्ष कान्यकुब्ज सभा ने किया।

इस कार्यक्रम में मधुसूदन यादव महापौर , एम आईं सी के अध्यक्ष राजा मखीजा संतोष पिल्लई नेता प्रतिपक्ष नगर निगम राजनांदगांव,कंवर सिह निषाद विधायक गूँडरदेही डा.एस. पी. द्विवेदी, डॉ शंकर मुनी राय, आर पी दीक्षित, डी सी जैन, जगदीश प्रसाद मिश्रा, प्रदीप मिश्रा, वी. डी. तिवारी, संजय श्रीवास्तव, अजय शुक्ला सचिव कान्यकुब्ज सभा अखिलेश तिवारी अध्यक्ष नांदगांव साहित्य एवम संस्कृति परिषद ,शैलेंद्र शुक्ला, विवेक शुक्ला, दुर्गेश त्रिवेदी, मनीष मिश्रा, भूपेंद्र बाजपेई, सुशील तिवारी, संजीव मिश्रा, धीरज दिवेदी, अखिलेश मिश्रा,अरुण निगम, डॉ मधु कामरा प्राचार्य ललित कुमार वर्मा, अध्यक्ष बक्शी सृजन पीठ ओम प्रकाश साहू, अध्यक्ष, पूरवाही एवम बडी संख्या मे साहित्यकार शोथ छात्र एवम साहित्य प्रेमियों ने अपनी सहभागिता दर्ज की।

