हम पौराणिक धर्म को छोड़ आधुनिकता की ओर भाग रहे हैं- मुनि वीरभद्र

हम पौराणिक धर्म को छोड़ आधुनिकता की ओर भाग रहे हैं- मुनि वीरभद्र


राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़)14 सितंबर।श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि हम जगत के साम्राज्य के लिए लड़ रहे हैं किन्तु उस परमसत्ता के लिए नहीं लड़ रहे हैं जिसकी वजह से हम हैं।

हम अपनी आत्मा के साम्राज्य के लिए,परमात्मा के साम्राज्य के लिए नहीं लड़ रहे हैं। मुनि श्री ने कहा कि हम पौराणिक धर्म को छोड़ आधुनिकता की ओर भाग रहे हैं।


जैन बगीचे के उपाश्रय भवन में मुनि श्री वीरभद्र(विराग)जी ने कहा कि मार्ग को किसी तरह बाधित नहीं होने देना चाहिए। हमें पौराणिक धर्म की ओर ध्यान देते हुए उसके मार्ग का बाधक नहीं बनना चाहिए। उसका मार्ग निष्कंटक और साफ रहे तभी वह हमें आनंद दे सकेगा। उन्होंने कहा कि हमारे अंदर हर पल आनंद बना रहना चाहिए।
मुनि श्री वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि हम सुख के पीछे दौड़ रहे हैं किंतु सुख कहां है, यह किसी को नहीं पता। हम भौतिक चीजों में सुख ढूंढ़ रहे हैं। हम सीमेंट को जोड़ने वाला मानते हैं जबकि सीमेंट, दो इंटों के बीच की दूरी बढ़ाता है। हम वास्तविक सुख आध्यात्मिक अर्थात आत्मिक सुख से दूर रह रहे हैं। कोई ना कोई चीज है जो हमारे भीतर के सुख से हमको दूर कर रही है। हम हर क्षण मौत के करीब आते जा रहे हैं, किंतु हम अपने अंदर की स्थिति/सुख से अनजान है। हमें यह जानने का प्रयास करना चाहिए कि, हमारे अंदर की स्थिति क्या है?
मुनि श्री वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि हर क्षण का जबरदस्त आनंद लेवें। तत्वों को जानने का प्रयास करें। यदि आप तत्वों की वास्तविक्ता को जान जाते हैं तो भीतर आनंद ही आनंद पाएंगे। शारीरिक दर्द आपको दर्द नहीं लगेगा। आप हर क्षण आनंद की अनुभूति कर पाएंगे। हर समस्या का समाधान आपके अंदर से ही मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि दूसरे के हिसाब से चलने से कुछ नहीं होता, अपने तरीके से बढ़ें और आराधना कर अपना मार्गनिष्कंटक और साफ बनायें। यह जानकारी एक विज्ञप्ति में विमल हाजरा ने दी।

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