राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ)22 सितंबर।श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि मिथ्यात्व एवं अज्ञानता के कारण ही हम अनंत काल से दुख भोगते आ रहे हैं। हमारी अज्ञानता की वजह से ही हमें वस्तुस्थिति का ज्ञान नहीं हो पाता और हम आत्मज्ञान प्राप्त नहीं कर पाते।मिथ्यात्व एवं अज्ञानता जब तक दूर नहीं होगी तब तक हम सुखी नहीं हो पाएंगे।
जैन बगीचे के उपाश्रय भवन में आज मुनि वीरभद्र (विराग) ज़ी ने कहा कि अज्ञानता के कारण एक स्मेल इस धरती पर फैला हुआ है जिसकी वजह से देवों के देव यहां नहीं आते। इस स्थिति से निपटने के लिए हमें ज्ञान का दीप जलाना होगा। कितने भी डॉक्टर दिखा लो मृत्यु तो आनी है, इसलिए आत्मा के डॉक्टर की शरण में जाइए।
आत्मा का एकमात्र श्रेष्ठ डॉक्टर प्रभु ही है। उनके शरण में जाने से लाभ ही लाभ मिलेगा। अनंत काल का सुख भगवान की शरण में ही है।
मुनि श्री वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि यहां के डॉक्टर इलाज करेंगे तो यह गारंटी नहीं है कि वह रोग फिर से ना आए किंतु भगवान के पास जाने से यह गारंटी है कि एक बार जो रोग गया फिर वह लौट के नहीं आएगा।
बस हमें उन पर भरोसा करना होगा। मुनि श्री ने कहा कि जब तक मिथ्यात्व को नहीं मारेंगे तब तक ज्ञान नहीं आएगा और जैसे-जैसे ज्ञान आते जाएगा मिथ्यात्व भी खत्म होता जाएगा। उन्होंने कहा कि सब परिवर्तनशील है,कोई स्थाई नहीं है। इसी तरह दुख और सुख भी स्थाई नहीं है।
मुनि श्री वीरभद्र(विराग) जी ने कहा कि अपने अंदर जैसी उदारता चाहिए वैसी नहीं है। हम अपने ऐशो-आराम के लिए सब कुछ करते हैं लेकिन साधार्मिक के लिए कुछ करने से हम झिझकते हैं। उन्होंने कहा कि मन में उदारता लाइए और साधार्मिक की भी मदद कीजिए। हमें हमारे पुरुषार्थ के अनुसार ही फल मिलेगा।
उन्होंने कहा कि अभी भी मौका है परमात्मा भक्ति पाने और आत्म कल्याण करने का। पता नहीं यह भव दोबारा मिले या ना मिले। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।

