राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 26 सितंबर। प्रख्यात जैन संत श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने जैन रामायण की कथा सुनाते हुए कहा कि हम इस दुनिया में आए हैं अपना-अपना रोल निभाने, किन्तु क्या हमने अपना रोल परफेक्ट निभाया? उन्होंने कहा कि श्री राम जी ने अपना रोल परफेक्ट निभाया इसलिए वे इतिहास में अजर अमर हो गए।
जैन बगीचा स्थित उपाश्रय भवन में मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि हम दूसरों को देखते हैं कि उसने क्या किया, उसने कैसा किया, उसने ऐसा किया,उसने वैसा किया आदि आदि,किंतु हम अपने को नहीं देखते कि हमने क्या किया।
हम यदि अपने को देखें और उसमें सुधार लाएं है तो हम भी अमर पात्र हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम दूसरों को ही देखने लगते हैं और उसीमें अपना समय बिता देते हैं, ऐसे में हमें अपने आपको सुधारने का समय कब मिलेगा?
मुनि श्री वीरभद्र( विराग )जी ने कहा कि हर पात्र के जीवन में बदलाव आता है, जरूरत है उस बदलाव का फायदा उठाकर आत्म कल्याण के मार्ग की ओर बढ़ने की। उन्होंने कहा कि व्यक्ति थोड़ा सा बदलाव पाकर विचलित हो जाता है और चारित्र (संन्यास) लेने की सोचने लगता है।
उन्होंने कहा कि जीवन में हर प्रकार की स्थिति आती है किंतु हमें उससे घबराना नहीं चाहिए और उसका डट कर मुकाबला करते हुए आत्म कल्याण के मार्ग की तरफ कदम बढ़ाना चाहिए। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।

