सौभाग्यमुनिजी के पुण्य स्मृति दिवस पर पूज्य मुकेशमुनिजी के सानिध्य में गुणानुवाद सभा…जिनशासन व संघ समाज के लिए समर्पित पूज्य सौभाग्यमुनिजी का जीवन- मुकेशमुनिजी…. सौभाग्यमुनिजी का जीवन हमारे लिए अनुकरणीय एवं प्रेरणादायी- हरीशमुनिजी

सौभाग्यमुनिजी के पुण्य स्मृति दिवस पर पूज्य मुकेशमुनिजी के सानिध्य में गुणानुवाद सभा…जिनशासन व संघ समाज के लिए समर्पित पूज्य सौभाग्यमुनिजी का जीवन- मुकेशमुनिजी…. सौभाग्यमुनिजी का जीवन हमारे लिए अनुकरणीय एवं प्रेरणादायी- हरीशमुनिजी

पूना महाराष्ट्र (अमर छत्तीसगढ) 28 सितम्बर। महापुरूषों का जीवन गुणों का भण्डार होता है उनके जितने गुणगान किए जाए कम प्रतीत होंगे। श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्यमुनिजी म.सा. श्रमण संघ की ऐसी विभूति थे जिन्होंने पूरा जीवन जिनशासन व संघ समाज की सेवा में समर्पित कर दिया।

सेवा की मिसाल व कलम के धनी होने के साथ उन्होंने जिनशासन को ऐसा साहित्य प्रदान किया जो आज भी हमारा मार्गदर्शक बना हुआ है। उन जैसे महान संतों की पुण्यतिथि मनाना तब अधिक सार्थक हो जाएगा जब उनके गुणों को अपने जीवन में अंगीकार करने का प्रयास करेंगे।

ये विचार पूज्य दादा गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा., लोकमान्य संत, शेरे राजस्थान, वरिष्ठ प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्रीरूपचंदजी म.सा. के शिष्य, मरूधरा भूषण, शासन गौरव, प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्री सुकन मुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती युवा तपस्वी श्री मुकेश मुनिजी म.सा. ने रविवार को श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, बिबवेवाड़ी पूना के तत्वावधान में श्रमण संघीय महामंत्री पूज्य सौभाग्यमुनिजी म.सा.‘कुमुद’ के पांचवे पुण्य स्मृति दिवस पर आयोजित गुणानुवाद सभा में व्यक्त किए। इस अवसर पर कई श्रावक श्राविकाओं ने दो-दो सामायिक की आराधना भी की।

धर्मसभा में सेवारत्न श्री हरीशमुनिजी म.सा. ने कहा कि संगठन के सजग प्रहरी,प्रखर वक्ता, कवि व लेखक पूज्य सौभाग्यमुनिजी म.सा. जिनशासन की शान थे ओर उनका पूरा जीवन धर्म प्रभावना में समर्पित रहा।

शांत, धैर्य व गंभीरता के गुणों से ओतप्रोत भक्तों के भगवान पूज्य सौभाग्यमुनिजी का पूरा जीवन चरित्र ही हमारे लिए प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय है।

पूज्य अंबालालजी म.सा. के गुरू चरणों में दीक्षा अंगीकार करने वाले सौभाग्यमुनिजी म.सा. की प्रेरणा से मुंबई में मेवाड़ भवन सहित कई जगह स्थानक बने तो कई जगह छात्रावास खुले। उनका पूरा जीवन भी श्रमण संघ कैसे आगे बढ़े ओर जयवंत रहे इसी भावना से कार्य करते हुए बीता।

प्रज्ञारत्न श्री हितेशमुनिजी म.सा. ने कहा कि श्रमण संघ के महामंत्री पूज्य सौभाग्यमुनिजी म.सा. के संघ-समाज पर जो उपकार है ओर जिनशासन की जो सेवा की उसे कभी नहीं भूलाया जा सकता।

ऐसे महापुरूषों का जीवन समाज के लिए प्रेरणादायी है। सेवा व साहित्य के क्षेत्र में अग्रणी पूज्य सौभाग्यमुनिजी म.सा. ने मानव सेवा व जीवदया के लिए हमेशा श्रावक-श्राविकाओं को प्रेरणा प्रदान की।

अनासक्ति ही साधुता का आधार-सचिनमुनिजी म.सा.

धर्मसभा में भगवान महावीर स्वामी की अंतिम देशना उत्तराध्ययन सूत्र की 27 दिवसीय आराधना के चौथे दिन प्रार्थनार्थी श्री सचिनमुनिजी म.सा. ने छठे अध्याय क्षुल्लक निर्ग्रन्थीय एवं सातवें अध्याय उरक्षीय का वाचन करते हुए उनसे जुड़े प्रसंगों की चर्चा की।

उन्होंने कहा कि साधुता के बाह्याचार सम्बन्धी संक्षिप्त वर्णन को “क्षुल्लक” कहा जाता है “प्रन्य” का अर्थ है-गाँठ अर्थ और काम इन दोनों में आसक्ति की प्रगाढ़ता ही गाँठ है, इस आसक्ति रूप गाँठ से जो मुक्ति चाहता है या मुक्त हो चुका है वह ‘निर्ग्रन्थ’ है।

उस निर्ग्रन्य के बाह्याचार या आचार-व्यवहार का जिसमें वर्णन हो, वह “क्षुल्लक निर्मन्चीय” अध्ययन है। ग्रन्थियों दो प्रकार की हैं-एक स्थूल और दूसरी सूक्ष्म।

आवश्यकता से अधिक वस्तुओं का संग्रह करना “स्थूल ग्रन्थि” कहलाता है तथा आसक्ति का होना “सूक्ष्म ग्रन्थि” है। निर्ग्रन्थ होने के लिए स्थूल और सूक्ष्म दोनों ही ग्रन्थियों से मुक्त होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि सातवे अध्ययन उरक्षीय में अनासक्ति पर बल दिया है। जहाँ आसक्ति है, वहाँ दुःख है, और जहाँ अनासक्ति है वहीं सुख है। इन्द्रियाँ क्षणिक सुख की ओर प्रेरित होती है पर वह सच्चा सुख नहीं होता, यह सुखाभास है। अनासक्ति ही साधुता का आधार है।

जो व्यक्ति साधु जीवन अपनाकर भी विषय वासनाओं में आसक्त रहता है, वह कभी दुःख से मुक्त नहीं हो सकता। धर्मसभा में युवारत्न श्री नानेशमुनिजी का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।

सुश्रावक मांगीलालजी मांडोत, रमेशकुमार कराड़, सोहनलाल कच्छारा ने भी पूज्य सौभाग्यमुनिजी म.सा. के प्रति विचार व्यक्त करते हुए भावाजंलि अर्पित की। सभा के बाद गौतमप्रसादी का आयोजन किया गया जिसका लाभार्थी श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन मेवाड़ संघ पुणे रहा।

चातुर्मासिक आयोजनों के तहत नवपद आयम्बिल ओली आराधना सोमवार 29 सितम्बर से प्रारंभ होकर 7 अक्टूबर तक चलेगी।

श्री मरूधर केसरी गुरू सेवा समिति,चैन्नई ने रखी आगामी चातुर्मास की विनती

धर्मसभा में श्री मरूधर केसरी गुरू सेवा समिति चैन्नई की ओर से पूज्य मुकेशमुनिजी म.सा. आदि ठाणा का आगामी चातुर्मास चैन्नई में करने की भावपूर्ण विनती गुरू चरणों में समर्पित की गई।

विनती प्रस्तुत करने वालों में समिति के अध्यक्ष आनंदराजजी छल्लाणी, महावीर सी भण्डारी, सुरेशचंद लुणावत, मदनलाल गुन्देचा, सुरेशचंद कोठारी, राजेशकुमार चौरड़िया आदि शामिल थे।

पूज्य मुकेशमुनिजी म.सा. ने कहा कि चातुर्मास सम्बन्धी आपकी विनती झोली में है तथा इस बारे में निर्णय पूज्य प्रवर्तक सुकुनमुनिजी म.सा. ही करेंगे।

चैन्नई से पधारे श्रावकों में भीकमचंद लुकड़,पदम कांकरिया, दिनेशकुमार भलगट, अजीत पटवा, अमरचंद कोठारी, अशोक धोका, अशोक गदिया, बादल कोठारी, देवीचंद बरलोटा, देवराज कोठारी, धर्मीचंद तालेड़ा, दिलीप बोहरा, दिलीप गुलेच्छा, दौलतराम नाबरिया, गौतमचंद बोहरा, गौतमचंद बोकड़िया, गौतमचंद लोढ़ा, गौतमचंद मुथा, गौतम तालेड़ा, गौतमचंद भण्डारी, इन्दरचंद जांगड़ा, जवाहरलाल कटारिया, महावीर गदिया,महावीर एच भण्डारी, महावीर सुराणा, महावीर तालेड़ा, मंगल कोठारी, मनीष रांका,मानमल मुथा, मनोज गदिया, मदनलाल दरड़ा, नरेन्द्र गुगलिया, प्रमोद गोठी, प्रसन्न दुग्गड़, राजेन्द्र बोहरा, राजेश तालेड़ा, रमेश दरड़ा, सागरमल कोठारी,शांतिलाल दरड़ा, शांतिलाल दुग्गड़, शांतिलाल गुगलिया,श्रेणिकलाल गदिया,सुरज सकलेचा, सुरेश गुगलिया,सुरेश जैन, सुरेश लोढ़ा, विजयकुमार लोढ़ा, विजयराज दुग्गड़, जैन कॉन्फ्रेंस प्रान्तीय महिला शाखा अध्यक्ष संगीताजी बांठिया आदि शामिल थे।

चैन्नई आदि स्थानों से पधारे अतिथियों का स्वागत बिबवेवाड़ी श्रीसंघ के पदाधिकारियों द्वारा किया गया।

प्रस्तुतिः निलेश कांठेड़, अरिहन्त मीडिया एंड कम्युनिकेशन, भीलवाड़ा,

Chhattisgarh