राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 1 अक्टूबर । छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल के अंतर्गत आईएएस अधिकारी जितेंद्र यादव को राजनांदगांव जिले का नया कलेक्टर नियुक्त किया है। यह निर्णय राज्य में सुशासन को मजबूत बनाने और जिलों के प्रशासनिक कार्यों को गति देने की दृष्टि से लिया गया है।
नई मुख्य सचिव की नियुक्ति के तुरंत बाद 14 आईएएस अधिकारियों के कार्यक्षेत्र बदले गए, जिसमें जितेंद्र यादव को राजनांदगांव का प्रभार सौंपा गया। यह बदलाव जिले में नई कार्यसंस्कृति और प्रशासनिक पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आईएएस जितेंद्र यादव 2019 बैच के अधिकारी हैं और छत्तीसगढ़ कैडर से जुड़े हुए हैं। मूल रूप से वे हरियाणा राज्य के रेवाड़ी जिले के कृष्णावासा गांव के निवासी हैं।
पढ़ाई के प्रति गहरी लगन और अनुशासित जीवनशैली के चलते उन्होंने इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की और उसके बाद सिविल सेवा परीक्षा में सफलता अर्जित कर देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा- भारतीय प्रशासनिक सेवा- में चयनित हुए। उनकी मेहनत और दृढ़ निश्चय उन्हें ग्रामीण पृष्ठभूमि से उठाकर प्रशासनिक उच्च पदों तक ले आया।
सेवा जीवन की शुरुआत में ही उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। वे दुर्ग जिले में सहायक कलेक्टर रहे, उसके बाद कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में एसडीएम के पद पर तैनाती मिली। प्रशासनिक कार्यकुशलता और जनता से जुड़ाव के कारण उन्हें जशपुर जिले में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) और बाद में रायगढ़ जिला पंचायत के सीईओ का दायित्व भी सौंपा गया।
इन पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया।
अब जब उन्हें राजनांदगांव कलेक्टर बनाया गया है, तो लोगों में नई उम्मीदें जगी हैं। यह जिला ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां प्रशासनिक पारदर्शिता, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का विकास, शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाना बड़ी चुनौतियाँ होंगी।
जनता को अपेक्षा है कि जितेंद्र यादव अपने पिछले अनुभवों का उपयोग करते हुए जिले को नई दिशा देंगे और विकास की गति को और तेज करेंगे।
जितेंद्र यादव की जीवनी से यह स्पष्ट होता है कि वे एक मेहनती, संवेदनशील और जनहितैषी अधिकारी हैं। उनकी कार्यशैली युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है, क्योंकि उन्होंने साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर कठिन परिश्रम के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। उनकी नियुक्ति न केवल राजनांदगांव के लिए बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए प्रशासनिक दृष्टि से एक सशक्त कदम है।

