राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ) 𝟭5 अक्टूबर। श्री विनय कुशल मुनि के सुशिष्य एवं 171 दिन तक उपवास का रिकॉर्ड बनाने वाले जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने आज यहां कहा कि विनय सारे गुणों का अधिकारी है। एक विनय जैसा गुण आने से ही कई गुण अपने आप ही आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु का सम्मान करना, घमंड नहीं करना, लोगों से सदव्यवहार करना, न जाने कितने गुण इस एकमात्र विनय गुण के कारण आते हैं।
जैन बगीचे के उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में जैन मुनि वीरभद्र (विराग) जी ने कहा कि अच्छा श्रावक बनने के लिए यह गुण अति आवश्यक है। एक अच्छे श्रावक में इसके अलावा कुछ और गुण होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक भूख बर्दाश्त कर सकते हो, करो। जब भूख बर्दाश्त से बाहर हो जाए तभी आप भोजन करो। भूख बर्दाश्त करने से आपकी तपस्या में गुणोत्तर वृद्धि होगी।
मुनि श्री वीरभद्र (विराग)जी ने कहा कि इसी तरह प्यास की स्थिति भी है। जब तक तेज प्यास ना लगे तब तक पानी का सेवन नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भूख और प्यास बर्दाश्त करने से तपस्या में गुणोत्तर वृद्धि होती है और यह समय आपकी तपस्या की समय के साथ जुड़ जाता है।उन्होंने कहा कि इसी तरह शीत एवं उष्णता को भी बर्दाश्त करना चाहिए।मुनि श्री ने कहा कि खाना खाते समय हमें यह कोशिश करनी चाहिए कि हम बिना पंखा के खाना खाये ताकि हमारे तपस्या में गुणोत्तर वृद्धि हो सके। इससे हमारे भीतर धीरे-धीरे समाधि के संस्कार बढ़ेंगे और हम आत्म कल्याण के मार्ग में कदम बढ़ सकेंगे। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।

