पूना महाराष्ट्र (अमर छत्तीसगढ) 30 अक्टूबर। जीवन में सफलता का मुख्य आधार विनय है। विनयशील की सभी जगह मांग रहती है जबकि घमण्डी ओर अहंकारी को कोई पसंद नहीं करता। हमारे में कितने भी गुण आ जाए लेकिन विनय का गुण नहीं आया तो सभी गुणों पर पानी फिर जाएगा। इसलिए जीवन में हमेशा विनम्र बनने का प्रयास करते रहे।
जिसके जीवन में विनय का गुण आ जाता है वह जीवन में हर सफलता को प्राप्त कर सकता है।ये विचार पूज्य दादा गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा., लोकमान्य संत, शेरे राजस्थान, वरिष्ठ प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्रीरूपचंदजी म.सा. के शिष्य, मरूधरा भूषण, शासन गौरव, प्रवर्तक पूज्य गुरूदेव श्री सुकन मुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती युवा तपस्वी श्री मुकेश मुनिजी म.सा. ने गुरूवार को श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ,बिबवेवाड़ी पूना के तत्वावधान में चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए।
उन्होेने कहा कि हम कितने भी शास्त्र पढ़े लेकिन विनयवान नहीं बन पाए तो ज्ञान हमारा कभी कल्याण नहीं कर पाएगा।

ज्ञानवान होने के साथ विनयवान भी हो जाए तो जीवन में हर कदम पर सफलता अवश्य मिलेगी। प्रज्ञारत्न श्री हितेशमुनिजी म.सा. ने कहा कि व्यक्ति जितना गुणवान होगा उतना ही विनयवान होगा। अहंकार में रहने वाले के गुण खाक हो जाते है ओर वह जीवन में कोई कार्य सिद्ध नहीं कर सकता।
विनय आने पर जीवन सार्थक होने के साथ आत्मकल्याण भी हो जाता है। उन्होंने कहा कि विनयवान व्यक्ति सबको प्रिय होता है ओर उसका हर कार्य सफल होता है। विनम्रता सफल जीवन की पहचान होती है। जिनके जीवन में अवगुण भरे होते है वह दूसरों के समक्ष झुक नहीं सकता है। जिसने विनय को अपना लिया उसने समस्त गुणों को अपना लिया।

प्रार्थनार्थी श्री सचिनमुनिजी म.सा. ने कहा कि विनय सच्चा प्रकाश एवं विकास होने के साथ गुणों का पूंज है। विनय मोक्ष का द्वार होने के साथ जीवन में उन्नति की पहली सीढ़ी है। विनय ही धर्म का मूल है। ज्ञान प्राप्ति के लिए विनय का होना आवश्यक है। परमात्मा के चरणों में स्थान पाने का एक मात्र उत्तराधिकारी भी विनयशील व्यक्ति होता है।
विनय एक तप है जो इसकी साधना करता है उसका मंगल होता है। धर्मसभा में सेवारत्न श्री हरीशमुनिजी म.सा. एवं युवारत्न श्री नानेशमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।
सर्व मंगल की कामना से कराया लब्धिधारक गौतमस्वामी का जाप
युवा तपस्वी श्री मुकेश मुनिजी म.सा. आदि ठाणा 5 के सानिध्य में बिबवेवाड़ी श्रीसंघ के तत्वावधान में प्रत्येक गुरूवार को होने वाले गुरू गौतम एकासन अनुष्ठान का समापन गुरूवार को विधिपूर्वक होगा। प्रार्थनार्थी सचिनमुनिजी म.सा. ने चातुर्मास के 17वें गुरू गौतम एकासन विधि सम्पन्न कराने से पूर्व गौतमस्वामी का जाप कराया।

जाप के माध्यम से प्रार्थना की गई कि सभी के जीवन में गौतम स्वामी की लब्धि एवं रिद्धि सिद्धि की प्राप्ति हो ओर सर्व मंगल व सुखशांति बनी रहे। जाप एवं स्वाध्याय के साथ एकासन अनुष्ठान सम्पूर्ण विधि सम्पन्न कराई गई। इस एकासन अनुष्ठान आराधना में कई श्रावक-श्राविका शामिल हुए।
गुरू मरूधर केसरी रूप सुकुन चातुर्मास समिति बेंगलौर ने रखी वर्ष 2027 के चातुर्मास की विनती
धर्मसभा में गुरू मरूधर केसरी रूप सुकुन चातुर्मास समिति बेंगलौर के पदाधिकारी एवं सदस्य पूज्य मुकेशमुनिजी म.सा. आदि ठाणा के वर्ष 2027 के चातुर्मास की भावपूर्ण विनती लेकर प्रस्तुत हुए।

समिति के भंवरलालजी पगारिया, महावीरचंदजी धोका, महावीरचंद लुकड एवं प्रसन्नचंदजी संचेती ने विनती पत्र का वाचन करते हुए कहा कि बेंगलौरवासी एवं गुरूभक्त इस चातुर्मास की लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे है। समिति के प्रतिनिधिमंडल ने विनती पत्र गुरू चरणों में समर्पित किया।मुकेशमुनिजी म.सा. ने कहा कि समिति की विनती झोली में है ओर सुख समाधे सर्व प्रकार की अनुकूलता होने पर वर्ष 2027 का चातुर्मास बेंगलौर में करने की भावना रखते है।

विनती प्रस्तुत करने वाले समिति के प्रतिनिधिमण्डल में सोहनलालजी मेहता, मीठालालजी कास्वा, उगमराजजी लुणावत, मांगीलालजी बोहरा, धर्मीचंदजी लुकड, दिनेशजी रांका, सज्जनराजजी रांका, जयचंदजी रांका, पन्नालालजी कोठारी, नेमीचंदजी चौरड़िया, गौतमजी दरड़ा, मनोहरलालजी लुकड, सुभाषजी मुथा, संतोषजी सांखला, मंगलचंदजी मुणोत, उगमराजजी कांकलिया, एन.गौतमचंदजी लुकड, अजयजी कांकलिया, जयंतिलालजी अखावत, पंकजजी कांकलिया आदि शामिल थे। पूज्य मुकेशमुनिजी म.सा. ने धर्मसंदेश प्रदान करते हुए मंगलभावनाएं व्यक्त की। अतिथियों का स्वागत बिबवेवाड़ी श्रीसंघ के पदाधिकारियों द्वारा किया गया।
प्रस्तुतिः अरिहन्त मीडिया एंड कम्युनिकेशन, भीलवाड़ा,

