ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 1 नवंबर
(प्रकाश जैन,वरिष्ठ पत्रकार)
देश के प्रमुख जैन तीर्थ श्री नाकोड़ा पार्श्व भैरव महातीर्थ के प्रति लोगों की गहरी आस्था श्रद्धा गहरी बढ़ती जा रही है। युवाओं का तीर्थ के महान चमत्कारी अधिष्ठायक देव श्री नाकोड़ा भैरव देव के प्रति बहुत गहरी श्रद्धा है। तीर्थ में पूनम की विशेष महत्ता है।

पूनम को लगता मेला जैसा नजारा
श्री नाकोड़ा तीर्थ के चेयरमैन देश के ख्यातनाम समाज सेवी रमेश चंद मुथा ने एक जानकारी में बताया कि तीर्थ में पूनम के खासे महत्व के मध्यनजर देश के सुदूर क्षेत्रों सहित विदेश से भी भक्त श्रद्धालु हजारों की तादाद में पहुंचकर अपनी हाजिरी लगाते है। पूनम के एक दिन पहले ही श्रद्धालुओ की आवाजाही शुरू हों जाती है। जो पूनम शाम तक लगातार जारी रहती है। तीर्थ में पूनम को मेले जैसा नजारा रहता है।

ब्यावर अजमेर किशनगढ़ सहित अनेक जगह से जत्थे पहुंचते है
युवा समाज सेवी तीर्थ के सेवा समर्पित कोषाध्यक्ष जीतू भाई चौपड़ा ने बताया कि पूनम को ब्यावर अजमेर किशनगढ़, बिजयनगर,भीलवाड़ा सहित देश के विभिन्न स्थानों से श्रद्धालुओं के जत्थे बसों एवम अन्य साधनों से यहां पहुंचते है जिनकी आवास प्रवास एवम भोजन की समुचित एवम शानदार व्यवस्था तीर्थ प्रबंधन द्वारा की जाती है। यात्रियों की ज्यादा आवाजाही पर तीर्थ स्थित शानदार भवन के अलावा तीर्थ के समीप स्थित रिसोर्ट में आवास की उचित दर पर व्यवस्था की जाती है।

अलभोर ब्यावर के गायक भैरव दादा को रिझाते हैं भक्ति से
ब्यावर के ख्यातिप्राप्त एवम उभरते गायक नाकोड़ा धाम के मुख्य मंदिर के बाहर पूनम को अलभोर 03 बजे से अपने भजनों की शानदार भक्तिमय प्रस्तुतियों से श्री नाकोड़ा भैरव देव को रिझाते हुए समूचे तीर्थ को गुंजायमान करते है।
पूनम को आयोजित भक्ति प्रभात का दिव्य आगाज जैन धर्म के शक्ति शाली महामंत्र नवकार के सामूहिक जाप से होता है। अलसवेरे नवकार महामंत्र की स्वर लहरियों से सम्पूर्ण तीर्थ अध्यात्म से परिपूर्ण हो जाता है।

ब्यावर से गए गायक शैलेश कोठारी,आशीष जैन,अशोक कोठारी, प्रकाश जैन,सुमित कोठारी सहित अन्य गायक मंदिर के पट्ट खुलने तक जैन धर्म के 23 वे तीर्थंकर श्री पारसनाथ भगवान एवम नाकोड़ा भैरव देव की भक्ति में भक्तों को गहरी डुबकियां लगाते हुए पूरे तीर्थ का वातावरण भक्तिमय कर देते हैं।
विगत 45 वर्षों से निरंतर जाने वाले ब्यावर के परम भैरव भक्त नगर के लब्ध प्रतिष्ठित व्यवसाई अशोक कोठारी सहित उनकी टीम बताती है कि नाकोड़ा महातीर्थ जन्नत है।
यहां आने पर अपार सुख शांति एवम दिव्य आनंद की अनुभूति होती है। पूनम को अल भोर भक्ति करने से वे पूरे महीने चार्ज हो जाते है। गायक शैलेश ऊर्फ बिट्टू बताते है कि तीर्थ में आने एवम भक्ति करने में अनुपम सकून मिलता है।
नाकोड़ा भैरव दादा हारे का सहारा है। हर समस्या का दादा के दरबार में दर्शन मात्र से हल हो जाता है। तीर्थ से जुड़े समाज सेवी प्रकाश जैन बताते है कि तीर्थ में विराजित श्री नाकोड़ा भैरव देव सबकी मुरादों को पूर्ण करते हैं हर भक्त की झोली को भरते हैं।

नाम मात्र के शुल्क पर पूनम पर ले जाते हैं ब्यावर के पूनम मंडल
ब्यावर से श्री नाकोड़ा महातीर्थ पर गहरी आस्था एवम श्रद्धा रखने वाले भक्तों ने विगत कई वर्षों से ब्यावर नगर में श्री नाकोड़ा पार्श्व भैरव दादा के नाम से मंडलों का गठन कर रखा है। सभी मंडल पूनम को नाम मात्र शुल्क पर नगर वासियों को तीर्थ की समुचित एवम शानदार यात्रा करवाते है।

जानकारी के मुताबिक मंडल की तीन बसों के सहित लगभग 500 श्रद्धालु तीर्थ में पूनम को अपनी हाजिरी देते हैं। मंडल द्वारा जाने वाली बसों में यात्रियों की शाही सुविधा उपलव्ध कराई जाती है। मंडल की बसों में जाने वाला मंडल की सेवा से बहुत पुलकित एवम प्रफुल्लित नजर आते हैं।
गूंजते है पार्श्व भैरव दादा के जयकारें
श्री नाकोड़ा महातीर्थ के सीओ सुरेंद्र राज सिंघवी ने बताया कि पूनम को अल भोर से पूरे दिन एवम रात तीर्थ में श्री नाकोड़ा पार्श्व नाथ एवम श्री नाकोड़ा भैरव दादा के जयकारों की गूंज गूंजती रहती है। अल भोर से ही मुख्य मंदिर के बाहर एक और जहां भक्ति की बयार बहती है वहीं दूसरी ओर पूजा करने वालो की लंबी लंबी कतारें पूनम को सहज देखी जा सकती है।पूजा अर्चना करने वालों में जबरदस्त होड़ रहती है। पूजा करने वालो के साथ साथ दर्शन करने वालों की भारी भीड़ के चलते कतार मंदिर के मुख्य गेट के बाहर पहुंच जाती हैं।

आरती के चढ़ावे की बोलियों में पूनम को जबरदस्त होड़ मचती है। तीर्थ के प्रति आस्थावान श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं की तमन्ना रहती है की इस दिन भगवान एवं दादा की आरती वे परिवार सहित करे। भाग्यशाली एवम पुण्य शाली आरती की बोली छुड़ाकर बहुत अभिभूत दिखाई देता है।
युवाओं की तीर्थ के प्रति गहरी आस्था
श्री नाकोड़ा तीर्थ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश बडेरा ने बताया कि तीर्थ के प्रति युवा पीढ़ी का तीर्थ के प्रति गत कुछ वर्षों से जबरदस्त रुझान बढ़ा है। पूरे वर्ष जहां एक ओर युवा पीढ़ी अपने परिवार सहित नाकोड़ा दर्शन एवम पूजा अर्चना को आते हैं।
वहीं दूसरी ओर वे अपने मित्र मंडलियों एवम मंडल के साथ अपने गांव नगर से तीर्थ तक पैदल यात्रा कर पहुंचूते है ये उनकी श्री पार्श्व भैरव दादा पर गहरी श्रद्धा,आस्था,समर्पण भावों का परिचायक है।

