ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 11 नवंबर।
(प्रकाश जैन,वरिष्ठ पत्रकार)
जैन धर्म में तप की खासी महता है। वर्ष पर्यंत जैन धर्म के अनुयाई श्रद्धालु भक्त तप त्याग में जुटे रहते हैं। वर्षा कालीन वर्षावास में संत महापुरुषों,आचार्यों साधु एवम साध्वी मण्डल के सानिध्य में श्रद्धालु श्रावक
श्राविकाएं अपने आराध्य गुरु भगवन्तों की दिव्य प्रेरणा तपस्या में लीन रहकर अपनी आत्मा का उत्थान करते हैं।इसी युक्ति को सार्थक किया ब्यावर की बेटी और अजमेर की बहु रानी सुनीता जैन ने। तपस्विनी सुनीता ने केवल गर्म धोवन पानी के आधार पर 11 उपवास की उग्र तपस्या कर अपनी आत्मा को कुंदन बनाया।

संस्कार विरासत में मिले थे तपस्विनी सुनीता को,नियमित धर्म ध्यान में रंगी रहती थी अपने भाई बहनों के संग
तपस्विनी सुनीता धर्म सहायिका विक्की जैन को धार्मिक संस्कार विरासत में मिले हुए थे। ब्यावर जिले के लब्ध प्रतिष्ठित सुश्रावक उत्तम
श्रीश्रीमाल की प्रतिभाशाली बिटिया एवं युवा संघ के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री समाज सेवी वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश जैन की भतीजी सुनीता सननू का बाल्यकाल में धर्म ध्यान एवम तप त्याग में गहरी श्रद्धा आस्था रही।

तपस्विनी सुनीता अपने परिवार के सदस्य बहन वनिता,रुचि शैली हर्षिता भाई आशीष, हर्षित के साथ ब्यावर नगर में विराजित साधु संतो एवम साध्वियों के नित्य प्रति दर्शन प्रवचन का लाभ लेना उसके जीवन का अभिन्न अंग रहा। वे नित्य प्रति अपने पारिवारिक जनों के साथ सामायिक साधना करते हुए अपने आराध्य गुरु समता विभूति जैनाचार्य श्री नानेश एवं व्यसन मुक्ति के प्रणेता श्री राम गुरु देव की गुरु चालीसा,गुरु भक्ति, भक्तामर स्त्रोत एवम श्री पार्श्वनाथ प्रभु की स्तुति में गहरी डुबकियां लगाते थे।

तपस्विनी सुनीता बोली तपस्या से इंसान की आत्मा एवम शरीर को नई शक्ति मिलती है
तपस्विनी सुनीता ने नानेश पट्टधर जैनाचार्य श्री राम गुरु की आज्ञानुवर्ती वरिष्ठ साध्वी रत्ना महासाती मनोरमा श्री जी की पावन प्रेरणा से सुनीता इस उग्र तप की ओर बढ़ सकी।बाकी तो उसने सोचा ही नहीं था कि वो 11 उपवास कर पाएगी।
गुरु भगवत की विशेष महर से इस तप को पूर्ण कर पाई है। तप पूर्णाहुति पर अजमेर रामनगर स्थित आवास पर पारिवारिक जनों एवं समाज के गणमान्य श्रावक श्राविकाओं के बीच बोली तपस्वी आत्माओं को जिनेश्वर भगवान एवम शासन माता मां चकेश्वरी देवी दिव्य शक्ति प्रदान करते हैं तप से आत्मा कुंदन बनती है। तपस्या करने से शरीर निर्मल बनता है वहीं आत्मा दिव्य बन जाती हैं। तपस्विनी ने कहा कि इंसान को नियमित तप त्याग जप जाप करता रहना चाहिए।

10 वर्षीय नन्ही बालिका के हाथों किया पारणा.
केवल गर्म पानी के आधार पर 11 उपवास करने वाली तप साधिका सुनीता का पारणा महोत्सव एक सादे समारोह में उसके आवास पर हुआ।जिसमें कावड़िया परिवार लौह पुरुष प्रेम सिंह भंवर बाई कावड़िया को परिवार जनों ने स्मृति पटल पर लाते हुए परिवार की लाडली बहु के तप की दिव्य अनुमोदना सामूहिक नवकार महामंत्र के जाप से की।
अनुमोदना अनुमोदना एवं केसरिया केसरिया आज महारों रंग केसरिया एवम तप गीतों की प्रस्तुतियों पूरे रामनगर क्षेत्र की गूंजाते हुए तपमय कर दिया।नन्ही बालिका पीयू जैन ने गुड का पानी पिलाकर तपस्विनी को अपने हाथों से पारणा का लाभ लिया।

बहुमान एवं स्वागत से कोसों दूर रही सुनीता
अजमेर जिले के लब्ध प्रतिष्ठित इल्ट्रोनिक्स व्यापारी कावड़िया इलेट्रिनिक्स के सुशील बीना कावडिया की पुत्रवधु सुनीता ने तपस्या आरंभ करने के पहले दिन ही परिवार जनों को आगाह कर दिया था कि वे तपस्या अपनी आत्मा को निर्मल एवम कुंदन बनाने हेतु कर रही है,आडंबर दिखावे से रहित तप में यकीन करती हैं।तपस्या के निमित कोई भी मंगल गीत,खाना नही करो तो ही वह तपस्या की ओर गतिशील होगी। साथ ही वे किसी बहुमान समारोह में न तो जायेगी और न ही किसी से स्वागत और बहुमान कराएगी। तपस्विनी के इस साहसिक कदम की अजमेर ब्यावर में व्यापक सराहना की जा रही है।
बिजयनगर महासाध्वी कमला श्री जी से लिए 11 उपवास के प्रत्यांख्यान
तपस्विनी सुनीता एवम संपूर्ण कावड़िया परिवार एक विशेष दल के साथ बिजयनगर में चातुर्मास हेतु विराजित श्री पन्ना सोहन गुरु संघ की महासाध्वी रत्ना श्री कमला जी ठाणा 05 के श्री चरणों में कस्बे के उपनगर स्थित अभय साधना केंद्र में महासती श्री कमला जी से 11 उपवास के पछखान किए। यहां ये उल्लेखनीय है कि कावड़िया परिवार की बहू ने सांसारिक मोह माया को तज कर आज से तीन साल पूर्व 2002 में संयम पद पर आरूढ़ होकर जिनशासन की दिव्य प्रभावना कर रहे है। वे अभी महासती श्री सिद्धि श्री जी के रूप में श्री प्राज्ञ संघ के युग पुरुष श्री पन्ना गुरु एवं श्री सोहन गुरु में जैन धर्म का गांव गांव अलख जगाने में जुटी हुए हैं।
तपस्विनी के आवास पर सुख साता पूछने वालों का तांता लगा
तप साधिका सुनीता के पारणा महोत्सव में स्कूल जाने से शरीक नही हो पाने का उसकी दोनों पुत्रियों सुविक्षा एवम समन्वी को गहरा मलाल रहा।स्कूल से आते ही अपने नन्हे हाथों से मां को गुड का पानी पिलाकर ही मानी। तप साधिका की अनुमोदन व सुख साता पूछने वालों का उसके आवास पर निरंतर तांता लगा रहा। तप पारणा महोत्सव पर ज्ञानचंद
प्रमोद कुमार विपिन,नितिन,शुभम,
राजकुमारी,पुष्पा, इंद्रा,पूजा चित्रा सहित अनेक श्रावक श्राविकाओ ने साक्षी बनकर तपस्या की दिव्य अनुमोदना की।

