ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 29 नवंबर।
भगवान देवनारायण की जन्मस्थली आसींद में वर्षाकालीन चातुर्मास पूर्ण कर ब्यावर के जन्मे जाए नव दीक्षित संत धैर्य मुनी जी महाराज अपने साथी संत धीरज मुनि के साथ कल रविवार को ब्यावर नगर में भव्य मंगल प्रवेश करेंगे।
श्री जैन वीर स्थानकवासी संघ,पिपलिया बाजार जैन स्थानक के सिरमौर महेंद्र सांखला ने एक जानकारी में बताया कि जैन समाज की पुरजोर विनती पर दोनों संत रविवार सवेरे 08.30 बजे चंपानगर से ससंघ पेदल विहार कर नगर में एक जुलूस के रूप में पधारेंगे।
चंपानगर के बंगले से नवदीक्षित संत धैर्य मुनि की पावन निश्रा में श्रद्धालु श्रावक सहित संघ का विराट रेला चंपानगर से रवाना होकर नगर के मुख्य मार्ग से होता हुआ नगर के प्रमुख जैन स्थानक पिपलिया बाजार पहुंचेगा।जहां संघ के प्रमुख लब्ध प्रतिष्ठित श्रावक श्राविकाएं, संत मंडल को साविधि वंदन नमन कर जय जयकारों के साथ अगुवाई करेंगे।
उल्लेखनीय रहे कि दोनों जैन संत श्री धैर्य मुनि एवं धीरज मुनि श्री प्राज्ञ संघ के गुरुदेव श्री पन्ना गुरु एवं गुरुदेव श्री सोहन गुरु संघ के नव दीक्षित संत हैं। 06 माह पूर्व विजयनगर में जैन भागवती दीक्षा भगवती अंगीकार करने के बाद गांव गांव ढाणी ढाणी में भगवान महावीर के एवं श्री पन्ना गुरु व श्री सोहन गुरु के उपदेशों को जन-जन तक पहुंचाते हुए आसींद चातुर्मास पूर्ण कर ब्यावर जैन समाज को आग्रह पर मान देते हुए ब्यावर पधार रहे हैं।
संत मंडल के ब्यावर पदार्पण को लेकर जैन समाज सहित जैनेतर समाज में भारी उत्साह का वातावरण बना हुआ है संत मंडल अल्पकालीन प्रवास के दौरान पिपलिया बाजार जैन स्थानक में प्रतिदिन प्रवचन देंगे। व्याख्यान के साथ-साथ अनेक धार्मिक कार्यक्रम संतो की निश्रा में आयोजित होंगे।
संघ महामंत्री पदम बंब ने ब्यावर के धर्म प्राण श्रद्धालुओं से संत मंडल के मंगल प्रवेश पर एवं प्रवास के दौरान आयोजित व्याख्यान एवं धर्म एवं तत्व चर्चा में शामिल होने का अनुरोध किया है।
03 दशक पहले संयम पथ के पथिक क्यों नहीं बने,मलाल है जैन संत को
बेशुमार संपदा को छोड़कर संयम पद के पथिक बनने वाले श्री धैर्य मुनि महाराज ने धर्म चर्चा के दौरान बताया कि संयम पथ पर आरूढ़ होने के बाद उन्हें बहुत आनंद आ रहा है साथ ही हर पल हर क्षण दिव्य शांति की अनुभूति होती है उन्हें इस बात का गहरा मलाल है कि 03 तीन दशक पूर्व संयम पथ के प्रति पथिक क्यों नहीं बने।
महज 06 माह के संयमी काल में जैन धर्म का डंका बजा रहे हैं दोनों जैन संत
संत श्री ने कहा कि मानव जीवन अति दुर्लभ है।इस जीवन को पाने के लिए देवता भी तरसते हैं l।अनंत अनंत पुण्य वाणी के चलते मानव जीवन की प्राप्ति होती है हमें इस जीवन का सम्यक उपयोग करना चाहिए। साथ ही अपनी आत्मा के कल्याण हेतु प्रतिदिन धर्म साधना में रमण करना नितांत जरूरी है।
धर्म की जड़ सदा हरी होती है जिस घर में नित्य धर्म साधना होती है।वहां सुख शांति का वास होता हैं। मनुज जीवन का उत्थान तभी होगा जब मानव संयम पथ पर अग्रसर होकर इस जन्म को सार्थक करेगा इससे ये भव और अगला भव भी सुधरेगा।
विदित रहे की दोनों संत ब्यावर के जन्मे जाए हैं दोनों संतों ने मात्र 06 माह की दीक्षा अवधि में अपने पहले चातुर्मास में आसींद में जैन धर्म का जोरदार डंका बजाया।उधर संत के सांसारिक सुपुत्र सुयश हिमांशु तातेड ने राजस्थान लहर को बताया कि जैन स्थानक पिपलिया बाजार में जिनशासन को दीपा रहे हैं धैर्य मुनि अल्पकालीन प्रवास के बाद संत मंडल नगर के अप नगरों में विचलन करेंगे।
साथ ही अनेक स्कूलों में संत मंडल का प्रवचन एवं गोष्ठी कार्यक्रम भी होगा केडी जैन स्कूल के निदेशक सुयश अंशुल तातेड ने अपनी मातृ श्री सरोज तातेड के साथ पुलकित होते हुए बताया की आज पूरे परिवार को गर्व एवम नाज है तातेड परिवार के मुखिया ने जैन दीक्षा लेकर जैन धर्म के 24 वे तीर्थकर भगवान महावीर के जिनशासन को दिपा रहे हैं।

