जशपुर(अमर छत्तीसगढ़) 22 दिसम्बर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिसने पुलिस जांच और पहचान प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
हत्या के जिस मामले में पांच आरोपियों को जेल भेज दिया गया था, वही केस पलट गया और मृत घोषित किया गया युवक खुद थाने पहुंच गया। अब पूरे प्रकरण की दोबारा जांच शुरू कर दी गई है और असली मृतक की पहचान की कोशिशें तेज हो गई हैं।
जशपुर जिले के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत पुरनानगर-तुरीटोंगरी जंगल में 22 अक्टूबर को मिली एक अधजली लाश को पुलिस ने ग्राम सिटोंगा निवासी सीमित खाखा (30) का शव मानते हुए हत्या का मामला दर्ज किया था।
इस मामले में रामजीत राम, विरेंद्र राम, एक विधि से संघर्षरत बालक समेत बाद में फरार आरोपी शीतल मिंज और जीतू राम को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। शव की पहचान मृतक के माता-पिता और भाई द्वारा कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के समक्ष की गई थी। वहीं आरोपियों ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने हत्या करना स्वीकार किया था।
फॉरेंसिक टीम द्वारा मौके पर सीन ऑफ क्राइम का रिक्रिएशन भी कराया गया था, जिससे मामला पूरी तरह सुलझा हुआ माना जा रहा था। लेकिन शनिवार की रात उस समय हड़कंप मच गया, जब मृत घोषित किया गया सीमित खाखा ग्राम पंचायत सिटोंगा की सरपंच कल्पना खलखो के साथ स्वयं सिटी कोतवाली थाना पहुंच गया।
सीमित खाखा ने पुलिस को बताया कि, वह मजदूरी के लिए झारखंड गया था, रांची से अलग होकर गिरिडीह जिले के सरईपाली गांव में काम कर रहा था। मोबाइल फोन न होने के कारण वह अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पाया।
एसडीओपी चंद्रशेखर परमा ने बताया कि, पुलिस ने शव की पहचान और आरोपियों के बयान सहित सभी कानूनी प्रक्रियाएं मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पूरी की थीं। सीमित खाखा के जीवित मिलने के बाद अब पूरे मामले की नए सिरे से जांच की जा रही है।
साथ ही गिरफ्तार आरोपियों की रिहाई के लिए वैधानिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। वहीं, वास्तविक मृतक की पहचान के लिए राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित कर जांच जारी है।

