ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 18 फरवरी।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री श्रुतप्रभ जी म.सा ने समता भवन मे भगवान महावीर के जीवन पर बताते हुए कहा भगवान महावीर ने हमे स्पष्ट धर्म बताया जिसे हम अभी तक समझ नही पायें अगर समझ जाते तो मोक्ष पा जाते हमे धर्म से मोक्ष की रस्सी मिल गयी फिर भी हम चढ नही पाये। हम धर्म तो कर रहे पर इच्छा पूरी नही होने से भगवान की वाणी आगम को समझ नही पाये, हर व्यक्ति का अपना अपना राग रहा इसकारण धर्म समझ नही पाये।
म सा ने कहा जिनकी श्रद्धा धर्म पर होगी वो ही धर्म मे डुबकी लगा देगा, जिसको अच्छा लगा वह धर्म को पकड लिया तुरंत सयंम ले लिया, आज हम अपना मोह छोड़ नही पाये छोडने का सास नही है। जीवन को दांव पर लगाना पडता पर हम लगाना नही चाहते उतना साहस भीतर मे नही रहा।जीवन को दांव पर लगाने से भगवान के बताये मोक्ष मार्ग का रास्ता मिल जायेगा।
म सा ने कहा श्रद्धां साहस सुख को दाव पर लगाने से आनंद होता है भगवान के मार्ग चलने मे आनंद आता है, आसु प्रज्ञा मे साहस श्रद्धा सुख सब आजाता है प्रज्ञा को जाग्रत करने के लिए जिनवाणी है, हर समय ऐसा काम करे की पाप से दूर हो जाये आसू प्रज्ञ होते ही शिघ् पाप दुर हो जाता है।
इससे पहले श्री प्रखर श्री जी म सा ने भजन से कहा आओ आगम के दर्पण मे निज को देखेंगे सुनने से जानेगे जानेगे तो बदलेंगे,तीर्थकर की अनुकम्पा से जिसने हम सब का हित देखा संसार के जीव पाप कर्म के बंधन से डरे ऐसा विचार बने की पाप कर्म से बचे, इसके लिए इच्छाओ को वासना को छोडना पडेगा, अपनी इन्द्रियों को वस मे करना होगा।
म सा ने कहा आसक्ति छोडेगे तो त्याग की भावना बढेगी, छोटे छोटे प्रत्याखान ले पायेंगे। इन्द्रियों का विषय इंधन के समान है जितना इंधन डालोगे उतना पाप बढता जायेगा। भरत क्षेत्र कर्म भूमि क्षेत्र है इसमे धर्म ध्यान करने का मौका मिलता है। मसा ने कहा उपाध्याय प्रवर जिस घर मे आहार साता कारी लगता वहां कभी नही लेते।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

