इंसान साधना में मन लगाए, जन्म व मृत्यु के बीच के समय को साधे- युगप्रभ मुनि

इंसान साधना में मन लगाए, जन्म व मृत्यु के बीच के समय को साधे- युगप्रभ मुनि

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 19 फरवरी।
(प्रकाश जैन)
नानेश पट्टधर,संयम सुमेरु,जैनाचार्य श्री विजय गुरुदेव के सुशिष्य संत प्रवर युगप्रभ मुनि ने कहा कि इंसान अपना मन साधना में लगाए मन के जीते सब जीत है। इंसान को जन्म व मृत्यु के बीच के समय को साधने का पुरुषार्थ सतत करते रहना चाहिए।


संत प्रवर तरुण तपस्वी युगप्रभ मुनि जैनाचार्य विजयराज मार्ग स्थित नवकार भवन में नियमित प्रवचन श्रृंखला के दौरान बोल रहे थे।
संत प्रवर मुनि श्री ओजस्वी व्यक्तव्य में कहा कि इंसान अपने तुच्छ स्वार्थ के खातिर पल पल झूंठ बोलकर कर्मों का बंधन कर रहा है उसे इस पाप कार्य का अगले भव में फल भोगना ही होगा। इंसान कोशिश करे मिथ्यात्व,झूठ से परे हटकर सत्कार्य में समर्पित रहे, तभी मानव जीवन की सार्थकता रहेगी।


संत प्रवर ने मर्म स्पर्शी देशना में कहा की संसार असार है।इंसान मोह माया में बुरी तरह झकड़ा हुआ है। मोह माया पर विजय पाने का भव्य पुरुषार्थ करें।इंसान बाहरी तत्वों में सुख ,शांति ढूंढ रहा है यह उसकी गहरी भूल है।असली शांति उसके भीतर में समाहित है। आवश्यकता इस बात की है कि इंसान अपने अंतर में रमण करें और दिव्य शांति की अनुभूति को खोजने का प्रयास करें।


संत प्रवर युगप्रभ मुनि ने कहा कि आत्मा अजर अमर है अविनाशी है। इंसान पाप से बचें। पाप कार्यों से बच कर पुण्य के कार्यों में लगे। उन्होंने इस बात पर गहरा दुःख जताया कि आज इंसान की दौड़ पद प्रतिष्ठा में लगी हुई है।जब कि दौड़ आत्मा के उत्थान की ओर होनी चाहिए।


इस अवसर पर संत श्री ने अपने कोकिल कंठ स्वर से “भजन करो मस्त जवानी में, बुढ़ापा किसने देखा है…” भाव भरे भजन की प्रस्तुति से पूरे नवकार भवन को गुंजायमान करते हुए भक्त श्रद्धालु श्रावक श्राविकाओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।

धर्म सभा में संतअभिनव मुनि ने कहा कि हम पाप की प्रवृत्तियों से बचकर पाप का पश्चाताप करते हुए शुभ एवं पुण्य कार्यों में अपनी शक्ति एवं धन का उपयोग करें। धर्म सभा का संचालन श्री साधुमार्गी शांत क्रांति जैन श्रावक संघ महामंत्री कमल छलानी ने किया वहीं श्रद्धालुओं को राजेंद्रकुमार ललित कुमार लोढ़ा ने प्रभावना देकर सम्मानित किया।


संत मंडल के ब्यावर प्रवास से युवा वर्ग जुड़ा धर्म ध्यान व जप तप से…
श्री साधुमार्गी शांत क्रांति जैन श्रावक संघ के मीडिया प्रभारी प्रकाश जैन ने बताया कि संत मंडल के ब्यावर प्रवास के दौरान युवाओं में धर्म ध्यान करने की विशेष जागरण हुई है। यूवा शक्ति का धर्म के प्रति खासा रुझान बढ़ा हैं।

संत मंडल के प्रवास स्थल नवकार भवन में पूरे दिन संत मुनिराजों के पावन सानिध्य में सामायिक साधना के साथ श्रद्धालु भक्त धर्म एवम तत्व चर्चा में जुट कर मनुज जीवन को सार्थक कर रहे हैं। संत मंडल का होली चातुर्मास ब्यावर में ही होना संभावित है।

नित्य प्रति 9.15 बजे से 10.15 तक व्यख्यान में संत प्रवर सहित संत मंडल जैन धर्म के विविध विषयों पर अपने मर्म स्पर्शी उद्बोधन से जिन वाणी की बरखा बरसाते है श्रद्धालु भक्त गुरु वाणी का श्रद्धा भक्ति से रसपान करने के साथ जीवन में तप त्याग का करने का नित्य संकल्प संतो से ग्रहण करते हैं। धर्म ध्यान का अनुपम ठाठ लगा हुआ है।


श्री विजय गुरु देव के 2026 के वर्षावास हेतु समर्पण भावो से जुटा संघ
संघ अध्यक्ष समाज सेवी संपतराज ढेडिया व संघ के राष्ट्रीय संरक्षक भामाशाह राजेंद्र कर्णावट
के नेतृत्व में संघ प्रमुख नानेश पट्टधर संघनायक गुरु भगवन श्री विजय राज जी म.सा. गुरुदेव के 2026 वर्षा कालीन वर्षावास करवाने हेतु पूरी सक्रियता से जुटे हुए है।

संघ का एक विशेष जत्था 06 मार्च को संघ प्रमुख भामाशाह हुक्मीचंद सिंगी के नेतृत्व में श्री विजय गुरु के श्री चरणों में गढ़ सिवाना जाकर ब्यावर चातुर्मास की पुरजोर विनती करेंगे। जत्थे में साधुमार्गी शांत क्रांति जैन श्रावक संघ,युवा संघ,महिला मंडल के साथ नगर एवम ब्यावर व आस पास के क्षेत्रो से विभिन्न सामाजिक,धार्मिक, संगठनों के लब्ध प्रतिष्ठित प्रमुख,
शिक्षाविद एवम कलमकार भी होंगे।

उल्लेखनीय है कि संघ के विशेष जत्थे तीन बार भारी तादाद में गुरु चरणों में पहुंचकर ब्यावर चातुर्मास करने की भावनाओं से अवगत करा चुका है। नगर वासियों को इस बार आश जागी है कि श्री विजय गुरु के 2026 के चातुर्मास का भव्य प्रसंग ब्यावर को ही मिलेगा।


प्रकाश जैन,वरिष्ठ पत्रकार
आशीष जैन फोटो जर्नलिस्ट
ब्यावर जयपुर

Chhattisgarh