जिनशासन मे आत्म शुद्धि का मार्ग प्रतिक्रमण सामायिक है, इसके करने पर पापो की शुद्धि होती जाती है- श्री श्रुतप्रभ जी

जिनशासन मे आत्म शुद्धि का मार्ग प्रतिक्रमण सामायिक है, इसके करने पर पापो की शुद्धि होती जाती है- श्री श्रुतप्रभ जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ) 27 फरवरी।
पुरे विश्व मे महान् आचार्य श्री रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री श्रुतप्रभ जी म.सा ने समता भवन मे नियमित भगवान महावीर के प्रवचन की श्रृखंला से बताया भगवान महावीर की आत्मा मे गुणो की मुख्य विशेषता रही अनंत शक्ति गुण वीर्य होता था।

उन्होंने ऐसा सतकर्म करा जो इस भव मे दीक्षा लेली पूर्व भव मे ऐक करोड़ वर्ष तक सयंम पाला था उनका सयंम बडा उत्कृष्ट भाव का था उनका पुण्य छोडने लायक होता था सभी तीर्थंकर देवो ने पुण्य छोडा न कि भोगा था, उन्होंने एक लाख वर्ष तक मासखमण किया तब जाकर उनकी शक्ति जाग्रत हुई थी।


म सा ने कहा जितना पुरुषार्थ करेंगे उतनी शक्ति जाग्रत होंगी, तपस्या की मेज पर अधिक समय तक नही बैठकर कठिन कार्य करने से शक्ति बढती है यानि धर्म क्रिया को शुद्धता से करना।

शुद्ध समायिक करने से धर्म शक्ति बढती है, सामायिक मे सकंल्प द्दढ होना चाहिए, प्रतिक्रमण शुद्ध करने पर पापो से बचा जा सकते क्योंकि प्रतिक्रमण पापो को मेंटेन करने से पापो की शुद्धि होती हैं।


म सा ने बताया प्रतिक्रमण हींसा को अहिंसा मे बदलना होता है। हमे प्रतिक्रमण, दया, पौषध, संवर को शुद्धता से पालन करना चाहिए। बुरे कामो मे सोचना उसको करु या न करु,जो नियम संकल्प आखरी समय तक रहता हे उसको शुद्धता से पालन करना चाहिए।इसी तरह भगवान की बाते उनके बताए नियम शुद्धता से करना होता है। संवर करने से शक्ति जाग्रत होती है।


इससे पहले महासती श्री प्रखर श्रीजी म सा ने कहा परिग्रह से आसक्ति होने पर इस लोक परलोक का नुकसान करती है। हमारी आत्मा तीर्थंकर की तरह पाप कर्म से मुक्त होनी चाहिए।म सा ने कहा तीर्थंकर देवो का जिनशासन मे अनंत अनंत भव्य आत्मा अपने पाप को धो देती है, इस शासन मे इतनी शक्ति होती है सारे पापो की शुद्धि हो जाती है।अनंत आत्मा ने करके बता दिया।


संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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