ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 5 मार्च।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री श्रुतप्रभ जी म सा ने समता भवन मे नियमित भगवान महावीर के प्रवचन की श्रृखंला से बताया जिस प्रकार मैरुपर्वत के चारो तरफ सूर्य चक्कर लगाकर उसे शुशोभित करता जा रहा है उसी प्रकार भगवान महावीर भी शुशोभित होते जा रहे हे और सबके दिलो मे बैठते जा रहे है और लोगो का कल्याण करने मे सहायक बन बैठे।
म सा ने बताया भगवान महावीर मे करुणा कूट कूट कर भरी थी सब को सुखी कैसे बनावे ताकि सभी का दुख दूर हो जाये इसी कारण बडे बडे राजा महाराजा प्रभु के पास आकर अपना दुख दूर कर लिया और जीवन अपना कल्याण कर लिया क्योंकि उन सभी की भगवान के प्रति ऐसी श्रद्धा समर्पणा होने के कारण सब कुछ छोडने को तैयार हो गये।
म सा ने कहा आज हमारी समर्पणा कहा जा रही है हम राग अलाग मे रहने लगे, राग का अपना ऐक कारण होता है।भगवान का ज्ञान बाटना अच्छी बात रही ताकि उन सबका भव सुधार जाये।व सभी जीवो का अभय दान देते रहे। भगवान महावीर पहले भी अमर थे आज भी उनकी अमृतवाणी अमर हो रही है। साधुमार्गी जैन संघ की समाचारी बतीस आगम का निचोड़ है।
इससे पहले साध्वी प्रखर श्री जी म सा ने कहा हमारे भारत के लोगों मे बुद्धि बहुत है पर उस बुद्धि का प्रयोग बडे बडे पैसे वाले करते जा रहे है। बुद्धि का मिस यूज नही हो नही तो खाता बंद होने मे देर नही लगेगी। तीर्थंकर की श्रद्धा से हमे जैन धर्म मिला।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ,ब्यावर।

