वन रक्षक ही बना जानवरों का भक्षक : युवा बाघ की हत्या करवाने वाला डिप्टी रेंजर निकला शिकारी गिरोह का हिस्सा

वन रक्षक ही बना जानवरों का भक्षक : युवा बाघ की हत्या करवाने वाला डिप्टी रेंजर निकला शिकारी गिरोह का हिस्सा

जगदलपुर(अमर छत्तीसगढ़) 18 मार्च । बस्तर के इंद्रावती और बीजापुर के जंगलों से जो कहानी सामने आई है। वो सिर्फ शिकार नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी की चीख है। यहां बाघ और तेंदुए की मौत हुई। लेकिन गोली से नहीं। बल्कि एक धीमी, दर्दनाक साजिश से।

तार के फंदों में फंसे दोनों वन्य जीव 2-3 दिनों तक तड़पने के बाद आखिरकार दम तोड़ दिया। इस पूरे खेल में एक ऐसा नाम सामने आया। जिस पर जंगल बचाने की जिम्मेदारी थी। दंतेवाड़ा वन विभाग का डिप्टी रेंजर देवी प्रसाद कोयाम भी इस शिकारी गिरोह का हिस्सा निकला।

वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने जब कार्रवाई की तो 9 आरोपी पकड़ में आए, जो बाघ और तेंदुए की खाल को बाइक के जरिए रायपुर ले जाकर बेचने की फिराक में थे।

बरामद खाल और हालात इस ओर इशारा कर रहे हैं कि शिकार हाल ही में हुआ और मारे गए बाघ की उम्र महज 3 साल थी, यानी एक युवा दहाड़ को हमेशा के लिए खामोश कर दिया गया।

विशेषज्ञ बताते हैं कि शिकारियों ने पुराने लेकिन बेहद क्रूर तरीके अपनाए। मांस के लालच में फंसाकर तार के फंदे गले में कस दिए और फिर उन्हें तड़पने के लिए छोड़ दिया गया।

सवाल अब सिर्फ शिकार का नहीं है सवाल उस भरोसे का है जो जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा पर टिका है। जब जिम्मेदार ही शिकारी बन जाएं तो जंगल की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे?

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