रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 31 जुलाई । आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशलसूरि जैन दादाबाड़ी में आयोजित प्रवचन में पूज्य साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने शुक्रवार को कहा कि मनुष्य कई पीढ़ियों का धन तो अर्जित कर लेता है, लेकिन धर्म को जीवन में स्थान नहीं दे पाता, क्योंकि उसके प्रति वास्तविक रुचि का अभाव होता है। धर्म केवल मंदिर जाने से नहीं, बल्कि श्रद्धा और रुचि के साथ जुड़ने से जीवन में उतरता है।
उन्होंने एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि एक माता अपने छोटे बच्चे को प्रतिदिन मंदिर लेकर जाती थी। माता नियमित रूप से मंदिर तो जाती थी, लेकिन उसका ध्यान धर्म के मर्म को समझने में नहीं था। वहीं बालक की रुचि मंदिर की पूजा-विधि, मंत्रों और धार्मिक संस्कारों में बढ़ती गई। एक दिन गुरु ने माता से मंत्र सुनाने को कहा, लेकिन वह उन्हें नहीं सुना सकीं। तब बालक ने अनुमति लेकर सभी मंत्र कंठस्थ सुनाए। यह देखकर सभी आश्चर्यचकित रह गए। साध्वीश्री ने कहा कि यह घटना बताती है कि जहां रुचि होती है, वहीं ज्ञान स्वतः प्राप्त होने लगता है।
उन्होंने कहा कि जैसे व्यापारी अपनी दुकान पर ग्राहकों की प्रतीक्षा में प्रतिदिन बैठता है, चाहे व्यापार हो या नहीं, उसी प्रकार यदि श्रद्धालु नियमित रूप से मंदिर में बैठने की आदत बना लें, तो धीरे-धीरे उनका मन धर्म में स्थिर होने लगेगा। निरंतर पुरुषार्थ, साधना और धर्म के प्रति लगन ही आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।
प्रवचन के अंत में साध्वी मंजुलाश्रीजी ने श्रद्धालुओं से धर्म को केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन का व्यवहार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि दृढ़ पुरुषार्थ और सच्ची रुचि के साथ किया गया धर्माचरण ही आत्मकल्याण का आधार बनता है।
भंसाली परिवार ने बोहराया ‘अध्यात्मसार’ ग्रंथ
आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशलसूरि जैन दादाबाड़ी में पूज्य उपाध्याय यशोविजयजी महाराज साहिब द्वारा रचित ‘अध्यात्म सार’ ग्रंथ बोहराया गया। भंसाली परिवार ने बाजे-गाजे और भक्तिमय वातावरण के बीच गाजे बाजे के साथ ग्रंथ के साथ दादाबाड़ी प्रवेश किया।

समिति ने बताया कि पूज्य प्रवचन प्रभाविका साध्वी मंजुलाश्रीजी महाराज साहिबा आगामी पूरे चातुर्मास के दौरान अपने मुखारविंद से ‘अध्यात्म सार’ ग्रंथ पर आधारित प्रवचनमाला प्रदान करेंगी। प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को अध्यात्म, आत्मचिंतन एवं जैन दर्शन के गूढ़ सिद्धांतों का सरल और व्यवहारिक मार्गदर्शन मिलेगा।
इस अवसर पर ग्रंथ बोहराने का लाभ लाभार्थी परिवार श्रीमती पानीबाई आसकरणजी भंसाली परिवार, कमलकुमारजी, सुनीलकुमारजी, सुरेशकुमारजी एवं अभयकुमारजी भंसाली परिवार को प्राप्त हुआ। धार्मिक उल्लास के बीच लाभार्थी परिवार ने श्रद्धा और भक्ति के साथ ग्रंथ बोहराया।
ग्रंथ बोहराने के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। समाजजनों ने इसे चातुर्मास की महत्वपूर्ण आध्यात्मिक शुरुआत बताते हुए आगामी चार माह तक आयोजित होने वाली प्रवचनमाला का अधिक से अधिक लाभ लेने का संकल्प व्यक्त किया।

1 अगस्त को होगा भव्य उद्घाटन, सम्मेत शिखर महातीर्थ के प्रतिकृति की होगी स्थापना
आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट द्वारा 1 अगस्त (शनिवार) को श्री जिनकुशलसूरि जैन दादाबाड़ी स्थित चल मंदिर में सम्मेत शिखर महातीर्थ के प्रतिकृति के पट का भव्य उद्घाटन एवं स्थापना विधि आयोजित की जाएगी। यह धार्मिक आयोजन प्रातः 9:30 बजे से प्रारंभ होगा।
आयोजन पूज्य प्रवर्तिनी महोदया, कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका निपुणा श्रीजी म.सा. की विदुषी शिष्या एवं प्रवचन प्रभाविका मंजुला श्रीजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा एवं प्रेरणा में संपन्न होगा।

स्थापना विधिकारक श्री विपिन बागरेचा (नागदा, मध्यप्रदेश) कराएंगे। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को सम्मेत शिखर महातीर्थ की प्रतिकृति के दर्शन एवं स्थापना महोत्सव का लाभ प्राप्त होगा।
श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली तथा आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति के अध्यक्ष बसंत लोढ़ा ने समाज के सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस पावन आयोजन का लाभ लेने की अपील की है।

