रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 19 मार्च । छत्तीसगढ़ बहुप्रतीक्षित विधेयक आखिरकार विधानसभा में पेश किया गया। गुरुवार को डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक विधेयक पेश किया।
जिस पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने विधेयक पर आपत्ति जताते हुए कहा कि, मध्यप्रदेश समेत 11 राज्यों में यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट में है। इन मामलों में अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है। इसलिए सदन में इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के जवाब पर विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि, नेता प्रतिपक्ष कन्फ्यूज हैं। बिना तथ्यों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट को बीच में ला रहे हैं।
देश के अन्य प्रांतों ने भी यह विधेयक बनाया है। मध्यप्रदेश ने पहले धर्म स्वातंत्र्य विधेयक रखा था। उन्होंने आगे कहा कि, विभाजनकारी स्थितियां थी, तब भी इस विधेयक को रखा गया था।
आसंदी ने विपक्ष की आपत्तियों को किया खारिज
विपक्ष की आपत्तियों पर डिप्टी CM विजय शर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि, सुप्रीम कोर्ट ने कोई स्टे नहीं दिया है और नए कानून बनाने पर भी कोई मनाही नहीं है। इस विषय पर सदन में चर्चा की जाएगी, जब सभी पक्ष आएंगे।
डिप्टी सीएम के जवाब के बाद आसंदी ने विपक्ष की आपत्तियों को खारिज कर दिया। आसंदी की अनुमति के बाद विजय शर्मा ने विधेयक का पुन:स्थापन किया। जिसके बाद विपक्ष ने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर चर्चा का बहिष्कार करते हुए दिनभर सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया।

