बस्तर(अमर छत्तीसगढ़) 30 मार्च । केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे पर सोमवार को लोकसभा में जानकारी दी। केंद्रीय गृहमंत्री श्री शाह ने कहा कि बस्तर में लाल आतंक की परछाई के कारण ही विकास कार्य प्रभावित रहे। हथियार उठाने वाले किसी भी समूह को संविधान की अनदेखी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ये जो हथियारी मूवमेंट के लोग हैं, कहते हैं हमारे साथ अन्याय हो रहा है। अन्याय हो रहा है तो उसके लिए व्यवस्थाएं और अदालतें बनी हैं। लेकिन हथियार उठाओगे और संविधान को नहीं मानोगे, ऐसा नहीं चलेगा। जो भी ऐसा करेगा, उसका यही अंजाम होगा।
उन्होंने आगे कहा कि, पिछले 70 वर्षों में 60 साल कांग्रेस की सरकार रही, फिर भी वहां विकास नहीं पहुंचा। अगर कांग्रेस शासन में विकास नहीं हुआ तो आज दूसरों से हिसाब मांगना उचित नहीं है। वर्षों तक करोड़ों लोग गरीबी में रहे, कई युवा मारे गए, कई दिव्यांग बने, लेकिन विकास वहां नहीं पहुंचा। इस पूरे संघर्ष का जिम्मेदार कौन है, यह विचार करने की आवश्यकता है।
नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी नहीं बल्कि एक राजनीतिक और वैचारिक आइडियोलॉजी है, जिसे इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान स्वीकार कर लिया।
नक्सल प्रभावित रेड कॉरिडोर में शामिल 12 राज्यों और आदिवासियों की समस्याओं को संसद में उजागर करने का मौका अब उन्हें मिला है। वे वर्षों से चाहते थे कि यह मुद्दा संसद में और दुनिया के सामने आए।
केंद्रीय गृहमंत्री श्री शाह ने आगे कहा कि, बस्तर में विकास न पहुँच पाने के कारण वहां के युवाओं को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर के आदिवासी क्षेत्र की जमीन और संसाधनों तक विकास के लाभ नहीं पहुंच पाए।
आज भी बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य चल रहे हैं और सरकार इसका पूरा ध्यान रख रही है। हथियार उठाकर शासन के खिलाफ जाने वालों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने आदिवासियों और स्थानीय लोगों से अपील की कि वे संविधान और लोकतंत्र की प्रक्रिया के माध्यम से ही अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढ़ें। विकास और सुरक्षा दोनों को संतुलित करना आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि, सरकार ने बस्तर में विशेष योजनाओं के माध्यम से गरीब और पिछड़े वर्गों के जीवन स्तर में सुधार के लिए कदम उठाए हैं। नक्सलवाद की जड़ में सामाजिक और आर्थिक असमानताएं नहीं बल्कि वैचारिक आंदोलन है, जो हिंसा के माध्यम से अपनी मांगें मनवाने का प्रयास करता है।
सरकार का उद्देश्य न केवल हिंसा को रोकना है बल्कि विकास के माध्यम से क्षेत्र को स्थायी रूप से मजबूत बनाना भी है। विकास योजनाओं का लाभ सीधे आदिवासियों तक पहुंचाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की मुख्य योजनाएं शामिल हैं।
केंद्रीय गृहमंत्री श्री शाह ने आगे कहा कि, क्षेत्र में सुरक्षा बलों और प्रशासन की गतिविधियों के माध्यम से हिंसा को नियंत्रित किया जा रहा है और साथ ही विकास कार्यों में तेजी लाई जा रही है।
विकास और सुरक्षा में सामंजस्य बनाकर बस्तर को पहले से अधिक समृद्ध और सुरक्षित बनाया जाएगा। बस्तर के लोग वर्षों से उपेक्षा और हिंसा का सामना कर रहे थे, लेकिन अब सरकार ने उनके कल्याण के लिए ठोस कदम उठाए हैं।

