भौतिक सुख को छोड़ना आध्यात्मिक सुख जोडना- श्री श्रुतप्रभ जी

भौतिक सुख को छोड़ना आध्यात्मिक सुख जोडना- श्री श्रुतप्रभ जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 6 अप्रैल।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य थोकडो के जानकार शासन दीपक श्री श्रुतप्रभ जी म सा ने समता भवन मे नियमित प्रवचन के दौरान कहा की भौतिक सुख को छोड़कर आध्यात्मिक सुख मे रहना होगा, तभी हम जिनवाणी को सुन कर समझ पायेंगे व अपनी पांचो इन्द्रियों के सुख से बच सकेंगे। प्रवचन वो दवाई है जो नुकसान नही करता।


आज व्यक्ति रस को छोड नही पा रहा ठूस ठूस कर खाते जा रहे है हम जो भी खा रहे जीव के लिए खा रहे है,आत्मा से पूछे क्या कारण हे हम खाते जा रहे हे,सिधी सी बात हम रस को छोड नही पा रहे।तभी तप नही कर सकते भावना ऊंची होगी तभी तप होगा। सुख को छोडने पर तपस्या होगी।


म सा ने कहा हम प्रतिक्रमण क्यो नही कर पा रहे, क्योंकि हम पैतालिस मिनट भी पांचो इन्द्रियों के सुख को छोड नही पा रहे, बात चीत के रस को छोडना नही चाहते, ध्यान नही कर पाते इसलिए मन रस मे दोडता जाता है।प्रतिक्रमण करने से परिग्रह नही बढता, उच्च गोत्र का बंध होता है, अंतराय कर्म छुटता है क्रम टुटेगा तो शक्ति बढेगी।


शासन दीपिका श्री विध्यावती जी म सा ने भजन से कहा मीठे मीठे काम भोग मे फंसना मत देवानु प्रिय,तेरे सुख की एक दिशा तू भीतर आ तू भीतर आ, जगत का है एक सपना जितना बढे उतना घटे।


संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ,ब्यावर।

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