श्रेष्ठ व्यक्ति कभी अपने गुणों का बखान नहीं करते – पंडित अर्पित भाई शर्मा

श्रेष्ठ व्यक्ति कभी अपने गुणों का बखान नहीं करते – पंडित अर्पित भाई शर्मा

राजनंदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 27 मई । श्री खाटू श्याम लखदातार सेवा समिति द्वारा संस्कारधानी नगरी में पावन पुरुषोत्तम मास के अवसर पर पहली बार पांच दिवसीय श्री श्याम महोत्सव के द्वितीय दिवस तीन दिवसीय श्री श्याम चरित्र कथा का आयोजन श्री खाटूधाम गायत्री विद्यापीठ केसर नगर में आयोजित हो रहा है।

व्यास पीठ पर अंचल के सुप्रसिद्ध भगवताचार्य पंडित अर्पित भाई शर्मा ने विराजमान होकर श्री श्याम चरित्र कथा का विस्तृत गुणगान करते हुए श्री हनुमत चरित्र कथा की व्याख्या की । श्री शर्मा ने कहा कि जहां भी श्री राम कथा , श्री भागवत कथा इत्यादि आयोजित होती है वहां श्री हनुमान जी स्वयं उपस्थित होकर कथा श्रवण करते हैं ।
कथा व्यास पंडित अर्पित भाई शर्मा ने कहा कि श्री हनुमान चरित्र कथा व्यक्ति के जीवन में ज्ञान की भूख से तृप्ति दिलाती है , उन्होंने बाल हनुमान चरित्र कथा का विस्तृत विवरण करते हुए कहा कि बाल हनुमान चरित्र कथा ज्ञान का प्रतीक है तथा प्रसंग को आगे बढ़ते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक बालक के जीवन में चंचलता होनी चाहिए , बालक के जीवन में चंचलता ना हो तो यह माना जाता है कि उसकी मानसिक तरंगे विकसित नहीं हुई है और उस बालक का बालपन बोझ लगने लगता है । प्रभु श्री राम के बालपन की लीलाओं का वर्णन करते हुए श्री कागभूसुंडी जी की लीला चरित्र का वर्णन किया ।


श्री शर्मा ने श्री जगन्नाथपुरी के बेड़ी हनुमान जी की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि महाप्रभु जगन्नाथ जी के मंदिर के अंदर समुद्र की लहरों की आवाज एवं मंदिर तक समुद्र के पहुंचने से होने वाली क्षति को रोकने के लिए प्रभु श्री राम ने श्री हनुमान जी को जिम्मेदारी सौंप थी । जगन्नाथपुरी में इस बेड़ी हनुमान जी का दर्शन कल्याणकारी होता है ।
भगवताचार्य पंडित अर्पित भाई ने कहा कि श्रेष्ठ व्यक्ति कभी अपने गुणों का बखान नहीं करते , उनकी श्रेष्ठता स्वयं बोलती है । पद्म पुराण में वर्णित महीसागर तीर्थ गुप्त क्षेत्र की व्याख्या करते हुए कहा कि ब्रह्मलोक में महीसागर ने अपने आप को सभी तीर्थ में श्रेष्ठ बताया था तब ब्रह्मा जी के पुत्र धर्म ने उन्हें उनके रजोगुण के कारण श्राप दे दिया था ।

बाद में नारद जी के कहने पर उस श्राप से मुक्ति का उपाय बताते हुए धर्म ने कहा था कि जब कभी कोई सच्चा संत – महात्मा इस गुप्त स्थल पर तपस्या करने आएगा तब यह महीसागर श्राप से मुक्त होगा । कथा व्यास ने कहा कि कलयुग के देव खाटू वाले श्याम प्रभु ने इस महीसागर के समीप कठिन तपस्या की थी , जिससे उसे श्राप से मुक्ति प्राप्त हुई । खाटू वाले श्याम प्रभु के चरित्र का गुणगान अगले दो दिवस तक जारी रहेगा ।।
प्रेषक :
अशोक लोहिया

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