ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 8 जुन।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री श्रुतप्रभ जी म सा ने समता भवन मे कहा बदुं पि लदुणं णिरे यानि बहुत बार हो जाने पर संचय नही हो, सारी इच्छा परिग्रह मे आती है जो नरक मे ले जाती है, भगवान महावीर क्षमाशील थे और हमारे अंदर अहंकार होने से समपर्ण भाव नही आ पा रहे है इसलिए अहंकार नही जा रहा। भगवान महावीर ने शरीर त्याग कर साधना ध्यान मे समर्पित हो गये।
म सा ने कहा आज जैन समाज को बदनामी से डर नही रहा,हमने न जाने कितनी बार संवत्सरी करी पर भीतर मे अभी तक क्षमाभाव नही आये इसके लिए अपनी लेबल से नीचे आना पडेगा तभी क्षमाभाव समपर्ण साधना होगी जैसे ऋषभदेव भगवान ने अर्जुन माली जैसे महान लोग नीचे आकर महान बने थे अर्जुन माली ने तो समभाव मे अपने आप को समर्पित कर दिया।
भगवान महावीर सभी जीवों के प्रति समपर्ण भाव रहा सभी जीवो के प्रति करुणा दया भाव रखते थे, क्रौध,अहंकार भीतर कितना भरा है जो तुरंत आ जाता है। क्रौध, मान, माया लोभ भीतर से निकालना होगा नही तो हमारा खून पीते रहेगे व अशांति फैलाते रहेंगे।सयंम के लिए शरीर का त्याग करना पडेगा।
म सा ने कहा धर्म ध्यान से धर्म क्रिया करते समय अलर्ट रहे।पूर्व भव की पुण्यवाणी अच्छी हो से भगवान मिलते है जैसे चंड कौशिक सर्प की पुण्यवाणी से भगवान महावीर मिले और संथारा लेकर देव बन गये।आज इस संसार मे धर्म 170 स्थानो पर हो रहा क्योंकि वही तीर्थंकर रहते हैंं।
इससे पहले श्री यत्नेश मुनि जी म सा ने भजन से कहा ना हम तुमको छोडें ना तुम हमको छोडा, यही याचना है यही याचना है गुरुवर पधारो हृदय मे विराजो यही प्रार्थना है मेरी यही प्रार्थना अपना बना लो गले लगा लो तुम्हे वंदना। पहले के लोगो मे आत्मियता थी आज मोबाइल युग मे दुरिया बनाकर रिश्ते से खोते जा रहे है।
म सा ने कहा प्रभुभक्ति मे श्रद्धा होनी चाहिए न अहंकार, आज व्यक्ति उत्क्रांति को छोड कर क्रांति मे जीते जा रहे है सिर्फ पैसो का दिखावा करके खुश होकर कर्मो का बंध करते जा रहे है, अपने पैसो का सदुपयोग करे, राजा महाराजा अहंकार मे भगवान के समोशरण मे जाते ही सारा अहंकार खत्म हो जाता दीक्षा ले लेते है। हमे अहंकार को कपूर की तरह उडा देना चाहिए।
महामंत्री धर्मीचंद औस्तवाल ने कहा आज की धर्म सभा मे वीर पिता गोतम चंद जी लुणिया वीर दादी जी उपस्थित रहें।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

