बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 30 जुलाई । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक मत्स्य अधिकारी भर्ती मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने साल 2025 की चयन प्रक्रिया और परिणाम को रद्द कर दिया है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने माना कि विभाग ने डिवीजन बेंच के स्पष्ट निर्देशों का पालन नहीं किया और भर्ती प्रक्रिया वैधानिक नियमों के अनुरूप नहीं अपनाई। कोर्ट ने 30 अप्रैल 2025 के चयन परिणाम और 19 मई 2025 की प्रकाशित सूची को निरस्त करते हुए पूरी प्रक्रिया नए सिरे से करने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल मामला वर्ष 2014 में निकले सहायक मत्स्य अधिकारी के आठ पदों की भर्ती से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि पात्र होने के बावजूद उन्हें पहले अपात्र घोषित कर दिया गया। इसके बाद मामला कई बार हाईकोर्ट और डिवीजन बेंच तक पहुंचा। डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को सभी अभ्यर्थियों के साथ याचिकाकर्ताओं के प्रकरण पर समान रूप से पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था, लेकिन विभाग ने केवल प्रतीक्षा सूची के एक अभ्यर्थी से तुलना कर चयन प्रक्रिया पूरी कर दी।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि, डिवीजन बेंच के आदेश का उद्देश्य सभी अभ्यर्थियों का समान आधार पर तुलनात्मक मूल्यांकन कराना था, जबकि विभाग ने उस निर्देश की अनदेखी की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवार से तुलना कर प्रक्रिया पूरी करना न्यायालय के आदेश का पालन नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने भर्ती समिति के गठन पर भी गंभीर आपत्ति जताई।
भर्ती नियम, 2009 के अनुसार चयन समिति तीन सदस्यों की होनी चाहिए थी, लेकिन विभाग ने बिना किसी वैधानिक प्रावधान के पांच सदस्यीय समिति बनाकर साक्षात्कार कराया। अदालत ने कहा कि जब किसी कार्य को करने की प्रक्रिया कानून में निर्धारित हो तो उसका पालन उसी तरीके से किया जाना अनिवार्य है। नियमों से हटकर अपनाई गई प्रक्रिया पूरी चयन प्रक्रिया को अवैध बना देती है।
इन दोनों गंभीर खामियों को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने चयन परिणाम निरस्त कर राज्य सरकार को निर्देश दिया कि, भर्ती नियम-2009 और डिवीजन बेंच के पूर्व आदेश के अनुरूप सभी पात्र अभ्यर्थियों का नए सिरे से निष्पक्ष मूल्यांकन कर चयन प्रक्रिया पूरी की जाए।

