रायपुर (अमर छत्तीसगढ़) 13 सितंबर। खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वर जी द्वारा प्रतिष्ठित श्री सीमंधर स्वामी जैन मंदिर व चमत्कारी श्री जिनकुशल सुरि जैन दादाबाड़ी भैरव सोसायटी में पर्युषण पर्व पर श्री सीमंधर स्वामी , तीर्थंकरों व दादागुरुदेव की प्रतिमाओं को सजाने के लिए आंगी वस्त्र लगाए जाते हैं ।
श्री सीमंधर स्वामी जैन मंदिर व दादाबाड़ी ट्रस्ट के अध्यक्ष संतोष बैद व महासचिव महेन्द्र कोचर ने बताया कि आंगी संरचना प्रभु भक्ति व कला का अनूठा संगम है । आंगी का अर्थ है कि भगवान के शरीर को चंदन केसर , सोने चांदी के बरक और हीरे जवाहरात माणक मोती आभूषणों से सुंदर व कलात्मक ढंग से सजाकर परमात्मा के समवसरण व अतिशय को प्रदर्शित करना है ।
चंदन केसर प्रभु की शीतलता व सुगन्ध प्रभु की वीतरागता और शांत स्वभाव को दर्शाते हैं । सोने का सुनहरा रंग प्रभु के केवलज्ञान के दिव्य प्रकाश व चांदी का रंग आत्मा की परमशान्ति व पवित्रता को दर्शाता है ।

ट्रस्टी नीलेश गोलछा ने बताया कि प्रतिमाओं की सजावट हेतु सामग्री व अहमदाबाद , सूरत व पालीताना तीर्थ से विशेष वस्त्र मँगवाए गए हैं जोकि सोने चांदी के धागों , हीरे माणक मोती से जड़ित हैं । पर्युषण पर्व के छठवें दिन श्री सीमंधर महिला मण्डल की श्रीमती पूनम बरमट व राधिका सेठिया द्वारा तपस्वियों के अनुमोदनार्थ प्रभुभक्ति रखी गई है । 15 सितंबर को संवत्सरी महापर्व मनाया जाएगा । प्रातः पोषध व्रत , बारसा सूत्र का वांचन होगा । भगवान का जन्मकल्याणक , स्नात्र महोत्सव श्री सीमंधर जैन मंदिर में मनाया जाएगा ।

