आबू रोड(अमर छत्तीसगढ़) 13 सितंबर । ब्रह्माकुमारीज द्वारा 9 से 13 सितंबर 2026 तक राजस्थान के माउंट आबू स्थित मानसरोवर परिसर में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन एवं मेडिटेशन रिट्रीट का समापन “शांति के नए युग की ओर सेतु के रूप में मीडिया” विषय पर आयोजित समापन सत्र के साथ हुआ। यह सम्मेलन प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की भगिनी संस्था राजयोग एजुकेशन एण्ड रिसर्च फाउंडेशन माउंट आबू के मीडिया एवं पी आर विंग द्वारा आयोजित किया गया था।
सम्मेलन में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल एवं सोशल मीडिया, जनसंपर्क, मीडिया परामर्श तथा शिक्षण क्षेत्र से जुड़े 1600 से अधिक मीडिया एवं संबद्ध पेशेवरों ने सहभागिता की।
सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञ वक्ताओं ने व्यावसायिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से मीडिया की भूमिका, जिम्मेदारी और भविष्य पर विचार-विमर्श किया। कुल 14 सत्रों में सत्य, विश्वास एवं पारदर्शिता, आंतरिक स्थिरता के लिए राजयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मीडिया, जिम्मेदार सोशल मीडिया, आध्यात्मिक सशक्तीकरण तथा शांति और सामाजिक एकता के निर्माण में मीडिया की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।
शुभ और शांत संकल्पों से बनेगी सकारात्मक मीडिया संस्कृति : राजयोगिनी बी.के. मोहिनी दीदी
समापन सत्र में ब्रह्माकुमारीज की एडमिनिस्ट्रेटिव हेड राजयोगिनी बी.के. मोहिनी दीदी ने कहा कि मीडिया सहित प्रत्येक व्यक्ति का प्रयास होना चाहिए कि उसके मन के संकल्प शुभ और शांत हों। “जैसे विचार होते हैं, वैसी ही वृत्ति बनती है।” मन की शक्ति ही संकल्प शक्ति है और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए स्वस्थ एवं सकारात्मक मन का निर्माण जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जीवन में तन, मन, धन और जन का संतुलन आवश्यक है। धन सब कुछ नहीं है, बल्कि उसका श्रेष्ठ उपयोग परिवार, समाज और मानव सेवा में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी को आत्मिक दृष्टि से मित्रभाव और समान भाव रखना चाहिए तथा प्रयास हो कि जीवन में ऐसा कोई व्यक्ति न हो जिससे हमारी दुश्मनी हो। दिव्य गुणों की धारणा और मानव जीवन की सेवा ही जीवन को सार्थक बनाती है।
राजयोगिनी बी.के. मोहिनी दीदी ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज की शिक्षा कमल पुष्प समान जीवन जीने की प्रेरणा देती है। जिस प्रकार कमल पर पानी की बूंद टिकती नहीं, उसी प्रकार हमारा जीवन भी ऐसा हो कि नकारात्मकता हमें प्रभावित न कर सके। उन्होंने सभी मीडिया प्रतिनिधियों को शुभभावना और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे यहां से सकारात्मक ऊर्जा, श्रेष्ठ संकल्प और नई प्रेरणा लेकर जाएं।
विश्व शांति के लिए ब्रह्माकुमारीज जैसे प्रयास महत्वपूर्ण : डॉ. उमानाथ सिंह
डॉ. उमानाथ सिंह, सीनियर एडिटर (डिजिटल), प्रसार भारती न्यूज सर्विस, नई दिल्ली ने कहा कि आज दुनिया के अनेक हिस्सों में युद्ध और संघर्ष की स्थिति है। ऐसे समय में शांति की परिकल्पना कितनी कठिन हो जाती है, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने वैश्विक संघर्षों से होने वाले भारी आर्थिक नुकसान का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे समय में ब्रह्माकुमारीज जैसी आध्यात्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे प्रयासों से शांति की दिशा में समाधान अवश्य निकलेगा।
मीडिया अपनी ऑडियंस को भी सकारात्मक बनाए : डॉ. विकास सिंह
डॉ. विकास सिंह, डीन, एएएफटी, नोएडा फिल्म सिटी, नोएडा ने कहा कि आज केवल मीडिया कर्मियों के व्यावसायिक और व्यक्तिगत जीवन में संतुलन बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मीडिया के माध्यम से ऑडियंस को भी मानसिक और भावनात्मक रूप से संतुलित एवं सकारात्मक बनाए रखना जरूरी है। मीडिया सामग्री का समाज और परिवार के व्यवहार पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने अपने प्रशिक्षण अनुभव साझा करते हुए बताया कि मीडिया कर्मियों के व्यवहार और मानसिक स्थिति का प्रभाव उनके पारिवारिक जीवन पर भी पड़ता है। इसलिए मीडिया प्रशिक्षण में मानवीय एवं भावनात्मक पक्ष को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
भारत-नेपाल के संबंधों को मजबूत करने में मीडिया की भूमिका
नेपाल से पधारीं सिस्टर माला कुमारी कर्ण, संपादक, कल्याणपोस्ट डेली पेपर एवं मध्यदेश वीकली न्यूजपेपर, नेपाल ने कहा कि भारत और नेपाल के संबंधों के बारे में बताते हुए कहा कि यह संबंध हमेशा मजबूत बना रहेगा। उन्होंने अयोध्या-जनकपुरी तथा काठमांडू-काशी के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मन को मिलने वाला विचारात्मक भोजन भी महत्वपूर्ण : डॉ. संजीव गुप्ता
डॉ. संजीव गुप्ता, एसोसिएट प्रोफेसर, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल ने कहा कि “जैसा खाएंगे अन्न, वैसा रहेगा मन” के साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि मन को किस प्रकार का विचारात्मक भोजन दिया जा रहा है। हम क्या पढ़ते, देखते और सुनते हैं, उसका प्रभाव हमारे मन पर पड़ता है।
उन्होंने सत्य को शांति का आधार बताते हुए कहा कि विभिन्न रंगों के मिलकर सफेद बनने की तरह विविधताओं में एकता ही समाज की शक्ति है। हमारी संस्कृति अंधकार में भी दीप जलाने की प्रेरणा देती है और मीडिया को भी समाज में सकारात्मकता का प्रकाश फैलाना चाहिए।
मीडिया के लिए सात सूत्रीय संकल्प एवं कार्ययोजना स्वीकार
समापन सत्र में बी.के. सरला बहन, वाइस-चेयरपर्सन, मीडिया एवं पीआर विंग तथा प्रो. (डॉ.) मानसिंह परमार, पूर्व कुलपति, कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन, ने सम्मेलन में तैयार संकल्प एवं कार्ययोजना प्रस्तुत की।
बी.के. सरला बहन ने सम्मेलन का एक्शन प्लान प्रस्तुत करते हुए कहा कि रामराज्य के आदर्शों को साकार करने के लिए सकारात्मक मूल्यों को समाज तक पहुंचाना जरूरी है और भगवान का संदेश जन-जन तक पहुंचाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन के विभिन्न सत्रों को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया गया था। प्रोफेशनल दृष्टि से मीडिया का सशक्तीकरण और आध्यात्मिक दृष्टि से मीडिया का सशक्तीकरण। सभी सत्रों से प्राप्त विचारों एवं सुझावों को समाहित करते हुए सामूहिक एक्शन प्लान तैयार किया गया।

प्रो. (डॉ.) मानसिंह परमार ने संकल्प एवं कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए कहा कि आधुनिक समाज में बढ़ते संघर्षों के मूल कारणों में मानवीय मूल्यों, नैतिकता और भावनात्मक दृढ़ता में कमी प्रमुख है। मीडिया को केवल समस्याओं की प्रस्तुति तक सीमित न रहकर उनके मूल कारणों और व्यावहारिक समाधानों को सामने लाने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मीडिया परिवर्तन का एक शक्तिशाली माध्यम और उत्प्रेरक है। सत्य, पारदर्शिता और विश्वास पर आधारित पत्रकारिता मानव कल्याण तथा राष्ट्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। जिम्मेदार मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

प्रस्तुत संकल्प एवं कार्ययोजना का अनुमोदन प्रो. संजय द्विवेदी, एचओडी, मास कम्युनिकेशन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल ने किया।
गहन विचार-विमर्श के पश्चात सम्मेलन में निम्नलिखित सात सूत्रीय संकल्प एवं कार्ययोजना स्वीकार की गई—
- आधुनिक समाज में बढ़ते संघर्षों के मूल कारणों में मानवीय मूल्यों, नैतिकता और भावनात्मक दृढ़ता में आई कमी है। मीडिया को केवल समस्याओं की प्रस्तुति तक सीमित न रहकर उनके मूल कारणों और व्यावहारिक समाधानों को सामने लाने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
- मीडिया परिवर्तन का एक शक्तिशाली माध्यम और उत्प्रेरक है। सत्य, पारदर्शिता और विश्वास पर आधारित पत्रकारिता मानव कल्याण तथा राष्ट्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
- जिम्मेदार सोशल मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसके लिए व्यापक मीडिया साक्षरता विकसित कर नागरिकों को जागरूक, सक्रिय और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाने की दिशा में कार्य करना आवश्यक है।
- मीडिया समाज का दर्पण होने के साथ-साथ उसके भविष्य का निर्माण करने वाली शक्ति भी है। मीडिया संस्थानों को शांति, समानता, स्थायित्व, साझा ज्ञान तथा वंचित और कमजोर वर्गों की आवाज को प्रमुखता देने वाली सार्थक पहलों को बढ़ावा देना चाहिए।
- केवल कानून, नियम और तकनीकी तथ्य-जांच उपकरण मीडिया की नैतिकता सुनिश्चित नहीं कर सकते। वास्तविक परिवर्तन मीडिया कर्मियों के आंतरिक मूल्यों और चेतना में परिवर्तन से संभव है। आध्यात्मिक सशक्तीकरण मीडिया को विभाजन और नकारात्मकता के स्रोत से ज्ञान, प्रकाश और एकता का माध्यम बना सकता है।
- ब्रह्माकुमारीज का मीडिया विंग जनसंपर्क एवं मीडिया नेटवर्क के साथ मिलकर नैतिक, मूल्य-आधारित और जिम्मेदार संचार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। आंतरिक शांति, सामाजिक एकता और मानवीय मूल्यों के संदेशों के माध्यम से शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वैश्विक समाज के निर्माण में योगदान देना इसका प्रमुख उद्देश्य है।
- इंडियन मीडिया काउंसिल की स्थापना की जाए, ताकि विभिन्न मीडिया संस्थानों एवं मीडिया कर्मियों को एक साझा मंच के अंतर्गत लाया जा सके।
राजयोग आत्मा परमात्मा स्नेहपूर्ण सम्बन्ध : डॉ. बी.के. सविता
डॉ. बी.के. सविता, नेशनल कोऑर्डिनेटर, वुमेन विंग, आरईआरएफ, माउंट आबू ने मेडिटेशन एक्सपीरियंस कराया। उन्होंने कहा कि राजयोग का अर्थ आत्मा का परमात्मा से स्नेहपूर्ण संबंध है। जिस प्रकार बैटरी को पावर सोर्स से जोड़ने पर वह चार्ज हो जाती है, उसी प्रकार राजयोग के माध्यम से परमात्मा से जुड़ने पर आत्मा सकारात्मक भावनाओं और शक्तियों से भर जाती है।

ब्रेकिंग नहीं, सशक्त न्यूज बनाएं : बी.के. शांतनु
समापन अवसर पर बी.के. शांतनु, नेशनल को-ऑर्डिनेटर, मीडिया एवं पीआर विंग ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिसने सेवा में अपना मन लगा दिया, उसने बहुत कुछ पा लिया। उन्होंने कहा कि परमात्मा से संबंध जुड़ने पर व्यक्ति अकेला नहीं रहता और सेवा के कार्य सहज रूप से सफल होते हैं।
उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों का आह्वान करते हुए कहा कि सम्मेलन से सभी “ब्रेकिंग न्यूज नहीं, बल्कि सशक्त न्यूज बनाएंगे” का संकल्प लेकर जाएं। केवल सम्मेलन की यादें लेकर नहीं, बल्कि नए संकल्प लेकर लौटें। उन्होंने कहा—“सकारात्मक सोचेंगे, सकारात्मक फैलाएंगे और अपने कर्मों से सेवा का प्रकाश फैलाएंगे।”

समापन सत्र में बी.के. अमरचंद, सब-जोनल कोऑर्डिनेटर, मीडिया एवं पीआर विंग, आरईआरएफ, आगरा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
बी.के. पुनीत, स्पिरिचुअल सिंगर, मुंबई ने दिव्य गीत प्रस्तुत किया तथा सिस्टर श्वेता सागर, कथक कलाकार, आगरा ने स्वागत नृत्य की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. बी.के. नंदिनी, एडिशनल जोनल कोऑर्डिनेटर, मीडिया एवं पीआर विंग, आरईआरएफ, अहमदाबाद ने किया।

यह सम्मेलन इस विश्वास के साथ सम्पन्न हुआ कि सशक्त, मूल्य-आधारित और जिम्मेदार मीडिया मानवता को एक बेहतर, शांतिपूर्ण और समरस विश्व की ओर ले जाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

