राजनांदगांव (अमर छत्तीसगढ़) 13 सितंबर। कान्यकुब्ज सभा राजनांदगांव एवं नांदगांव साहित्य एवं संस्कृति परिषद के संयुक्त तत्वावधान में डॉ0 बलदेव प्रसाद मिश्रा की 128 वीं जयंती मनाई गई एवं शहर में विविध आयोजन किये गये।
प्रथम सत्र में स्थानीय त्रिवेणी परिसर में स्थापित संस्कारधानी के प्रमुख साहित्यकारो डॉ0 बलदेव प्रसाद मिश्र, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, गजानन माधव मुक्तिबोध की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई तत्पश्चात डॉक्टर बलदेव प्रसाद मिश्र हायर सेकंडरी स्कूल में स्थापित प्रतिमा पर भी पुष्प माला अर्पित की गई।
द्वितीय सत्र संध्या 6 बजे ऑनलाइन मंच पर परिसंवाद के माध्यम से उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर साहित्यकारों द्वारा प्रकाश डाला गया। मुख्य वक्ता के रूप में शशांक शर्मा अध्यक्ष साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ. मिश्र बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, उनके द्वारा रचित तीन महाकाव्य उन्हें हिंदी साहित्य की श्रेष्ठतम ऊंचाई में पहुंचने के लिए काफी हैं। उनके द्वारा रचित लगभग 80 दुर्लभ ग्रंथ हमारी अमूल्य निधि है।

विशिष्ट वक्ता बलदाउ राम साहू अध्यक्ष हिंदी साहित्य समिति एवं पूर्व अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग आयोग छत्तीसगढ़ शासन ने साहित्य प्रेमियों को संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. मिश्र की रचनाओं में अभी बहुत शोध कार्य करना बाकी है उन्होंने संस्कारधानी के साहित्य प्रेमियों से आग्रह किया कि इस दिशा में सकारात्मक कदम उठावे। डॉ चंद्रशेखर शर्मा ने अपने आधार वक्तव्य में मिश्र जी की विभिन्न रचनाओं पर प्रकाश डालते हुए डॉ. मिश्र को राम काव्य परंपरा का श्रेष्ठतम कवि निरूपित कर कहा डॉक्टर मिश्र एक श्रेष्ठ साहि�
शिक्षा शास्त्री, राजनीतिज्ञ, दर्शनाचार्य, स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजसेवी थे ।
उल्लेखनीय है कि भागवताचार्य डॉ. लोकेश शर्मा जिन्होंने डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र के साहित्य पर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है, ने दावा किया है कि हिंदी साहित्य जगत में डॉक्टर मिश्र को वह स्थान नहीं मिला जिसके वे वास्तव में अधिकारी थे। उन्होंने कहा कि डॉ0 मिश्र जी के साहित्य में शोध कार्य की असीम संभावनाएं अभी भी विद्यमान हैं।

डॉ मुनेश्वरी साहू ने भी डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र के साकेत संत पर शोध कार्य कर डॉक्टरेट की पदवी प्राप्त की है। उन्होंने साकेत संत एवं साकेत का तुलनात्मक विवेचन कर साहित्य प्रेमियों को मंत्र मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में डॉक्टर मिश्र जी के पौत्र पंडित प्रदीप कुमार मिश्रा सेवानिवृत डीएसपी ने सभी साहित्यकारों एवं कार्यक्रम में सहभागी समस्त साहित्य प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉक्टर श्रीमती नीलम तिवारी ने किया । संगोष्ठी में मुख्य रूप से प्रभात तिवारी, ऋषि कुमार तिवारी, अजय शुक्ला, अखिलेश तिवारी, ओम प्रकाश साहू, रोशन साहू, दिवाकर बाजपेइर्, अखिलेश मिश्रा, योगेश एवं बड़ी संख्या में देश विदेश के साहित्य प्रेमियों ने अपनी सहभागिता दर्ज की।

