ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 15 जुन।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री रोहित मुनि जी म सा ने समता मे प्रवचन पर संघ पर कहां बिमारी न बुढापा देकती न जवानी देखते न बचपन देखता, कभी भी आ सकती इस शरीर का भरोसा नही शरीर पर रोगो का आक्रमण जो रहा, आराम से बैठे काम कर रहे अगले क्षण क्या होगा किस क्षण बिमारी का प्रवेश हो जाए बिमारी का घर बन जाए, ज्ञानीजन कहते इस शरीर से कब क्या हो जाए, जिंदगी पानी की बूंद कब मिट जाए रे होनी अनहोनी कब हो जाए रे।प्रतिपल सावधान रहे, कब क्या घटना घट जाये उससे पहले हमे सावधान होना पडेगा।
म सा ने कर्मो पर कहा कर्म की माया गति बडी विचित्र हे कर्म किस समय क्या कर डाले पता नही चलता इसके आगे अच्छे अच्छे लोग हार गये, कर्मो के खेल निराले हे ऋषि मुनि भी इनसे हारे है, कर्म बडा विचित्र है तीर्थंकर जैसी आत्मा को नही छोडा, कर्म सोच समझ कर करना चाहिए क्योंकि हम इज्जत खरीद सकते पर कर्म को हम खरीद नही सकते। अशुभ कर्मो का योग होने पर बडे सा बडा डाक्टर की दवाईया काम नही आती।
म सा ने कहा हमे शांति समाधि मे रहने की कला प्रकट होनी चाहिए, सुख दुख जिंदगी का हिस्सा है,सुख दुख घटाना बढाना हमारे हाथ मे है, जो होना हे उसे रोक नही महापुरुष कभी भी कष्टों से घबराये नही, हमारा जीवन बहता पानी के समान है कभी नही रुक सकता न कोई रोक सकता, हमे इस बहते जीवन को विश्राम देने की जरुरत है।हमे सभी परिस्थिति मे समभाव से रहना चाहिए।
म सा ने कहा छोटी सी बिमारी हमारा धैर्य खो देता है, पुरूषार्थ हमारे हाथो मे है जो क्षण पल लिखा है वो टल नही सकता, कर्म कब जाने हमे नीचे पटक दे, तीर्थंकर इस घडी को टाल नही सके हम क्या चीज है क्योंकि टालना महापुरुषों के हाथो मे भी नही था हम क्या कर पायेंगे, म सा ने कहा सुख मे फूलो मत दुख मे घबराओ मत गंभीर बिमारी मे छोटे छोटे नियम पालने से बडी से बडी बिमारी विपक्ति को टाल देती है जहा दवा काम नही करती दुआ काम कर जाती है। इससे पहले श्री यत्नेश मुनि जी म सा ने भजन से कहा प्रभु तुम्हारे पावन पथ पर, जीवन होता रहा प्राणो की प्रवाह नही क्षणो को अटल निभायेगा, प्रभु मार्ग पर चलने वालो को शारीरिक कष्ट आये बिना नही रहेगा वो ही कष्ट आगे शांति देने वाला बन जायेगा, संघ परिवार मे विकास के लिए एक दुसरे का साथ होते रहना चाहिए।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ,ब्यावर।

