रायपुर (अमर छत्तीसगढ़) 15 जुन।
सोमवती अमावस्या के शुभदिवस खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वर जी द्वारा प्रतिष्ठित चमत्कारी श्री जिनकुशल सूरि जैन दादाबाड़ी , भैरव सोसायटी में तप चक्रवर्ती श्री विराग मुनि भगवंत के 165 उपवास के सुखशाता की मंगलभावना के साथ दादागुरुदेव की बड़ी पूजा बड़े उल्लासपूर्ण भावों से सम्पन्न हुई । ज्ञात हो कि पूज्य श्री विराग मुनि जी के आज 16 जून को 166 वां उपवास है और यह क्रम अभी आगे जारी है ।
जैन धर्म मे चारों दादागुरुदेव कि असीम कृपा रही है विशेषकर तृतीय दादा श्री जिनकुशल सूरी जी तो प्रगट प्रभावी दादा है जो भी इनको मन से भक्ति भाव से पुजा अर्चना करता है उसे मनवांछित फल निश्चित ही प्राप्त होता है उपरोक्त उदगार पूजा के अनुष्ठान में अध्यक्ष संतोष बैद ने व्यक्त करते हुए दादागुरुदेव को नमन किया ।
श्री सीमंधर स्वामी जैन मंदिर व दादाबाड़ी ट्रस्ट के महासचिव महेन्द्र कोचर ने कहा कि गतिमान 166 उपवास की उग्र तपस्या करने वाले तप चक्रवर्ती श्री विराग मुनि जी खरतरगच्छ जैन समाज की शान हैं । पूज्य गुरुदेव की तपस्या की सुखशाता पूछते हुए बारम्बार अनुमोदना करते हैं । आगामी 18 जून को छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर खरतरगच्छ के सातवें आचार्य बनेंगे गणिवर्य श्री विनय कुशल मुनि जी , आपकी प्रेरणा व मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में नई जागृति आवेगी ।

पूजा का आगाज मंत्र नवकार हमें है प्राणों से प्यारा के भजन से करते हुए सर्वप्रथम स्थापना का विधान नारियल अक्षत के साथ मंत्रोच्चार से प्रारम्भ हुआ फिर प्रथम नवहन जल अभिषेक का विधान गुरु प्रतिख सुरतरु रूप सुगुरु सैम दूजो तो नही के बोलो के साथ संगमरमर की कलात्मक छतरी में विराजित मूर्तियो को पवित्र जल से अभिषेक कर पूर्ण विधि विधान से जल पूजा सम्पन्न किया गया।
इसी के साथ सुप्रसिद्ध गायक वर्द्धमान चोपड़ा व दीप्ति बैद के भक्ति पूर्ण भजनों से भक्ति रस की अविरल गंगा प्रवाहित होने लगी कैसे कैसे अवसर में गुरु राखी लाज हमारी मोको सबल भरोसो तेरो चंद्रसूरी पट्टधारी के गुणानुवाद स्वरूप बोलो ने सभी को भाव विभोर कर दिया-इसी के साथ क्रमशः चंदन , धूप , दीपक , अक्षत पुष्प , नेवैद्य , फल के अर्पण द्वारा दादा गुरुदेव के अष्ठ प्रकारी पूजा का विधान सम्पन्न किया गया ।
तत्पश्चात ध्वज पूजा चांदी की ध्वजा को महिलाओं द्वारा सिर पर रखकर धूप दीप व शंख व घन्टानाद द्वारा छतरी की 3 प्रदक्षिणा देकर ध्वज पूजन कर हरख भरी के बोलो के साथ शिखर पर ध्वजा समर्पित की गई फिर वस्त्र व अर्ध्य पूजा का विधान मंत्रोच्चारो के साथ सम्पन्न कर पुजा का समापन आरती व मंगल दीपक द्वारा किया गया । गुरु प्रभावना लाभार्थी परिवारों की ओर से रखी गई थी ।

