ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 16 जुन।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री रोहित मुनि जी म सा ने समता मे प्रवचन भक्ति पर कहा भक्ति करने का अनेक मार्ग होता है भक्ति कर्म निर्जरा कराती है भक्ति के साथ भाव होना जरुरी है वह हमारे मन को पवित्र निर्मल बनाता है।
भक्ति चंदन बाला जैसी आचार्य मानतुंगा जो भक्ति मे इतने लीन हो गये एक एक श्लोक की रचना होती गयी और काराग्रह के बावन ताले टूटते गये।भजन से कहा जिया कब तक उलझेगा संसार विकल्पो से…
म सा ने बताया चापलूस व्यक्ति भक्ति नही कर सकता, जितने भी चमत्कार हुए सब भक्ति के कारण हुए,चमत्कार की घटना काल्पनिक नही होती,भक्ति पाप कर्मो के बंधन को तोड देती है,नवकार परमेष्टी महामंत्र की भक्ति शुद्ध मन से की जाए तो सारे पापो का नाश कर देता है, जीवा पर हो नाम तुम्हारा प्रभुवर ऐसी शक्ति दो समभावो से कष्ट सहूं ऐसी भक्ति हो मुझमे, भक्ति मे अदंर के भाव जुडने चाहिए,भक्ति की नही जाती स्वतःहो जाती है।
म सा ने कहा तीर्थकर देवो की आज्ञा का पालन करना भक्ति करना है, अहोभाव से सुनना आचरण करना भक्ति का रुप होता है। भक्ति मे चंदन वाला जैसा समपर्ण होना चाहिए जिसने अपना जीवन ही समर्पित कर दिया।
जो व्यक्ति भोगो मे लीन पडा वह भव भव मे दुख पाता है, कितने भव बीत गये संकल्प विकल्पो मे।कहने से कोई फर्क नही पडता हमारा कुछ बिगडने वाला नही जो लिखा होगा वही होकर रहेगा।
म सा नू ईष्या पर कहा ईष्या की आग अनेक लोगो के जीवन मे आग लगा देती हे, ईष्या का प्रवेश ईच्छाओं का खत्मा कर देता हे, ईष्या निंदा करना सिखाता है, करने वाला आलोचना नही करता ईष्या से व्यक्ति खुद सुखी नही न दुसरे को सुख दे सकता, जितनी प्रतिस्पर्धा उतना आगे बढाता है, जैसी सोच वैसा आचरण वैसा जीवन हमारी सोच ऊंची रखनी चाहिए।
इससे पहले श्री यत्नेश मुनि जी म सा ने भजन से कहा सिद्धो की आत्मा से मेरा तार जुड गया, तीर्थंकर की देशना आत्मा को पावन निर्मल बनाने वाली होती है जिससे साधक प्रभु के चरणो मे समर्पित हो जाते है, लेकिन कर्मबंध होने के कारण संसार मे भटकता रहता हैं. इच्छा नाश के समान होती है, आज लोगो को पैसे कमाने की धुन रहती है,हमारी तृष्णा कुंऐ के समान खाली होती है भजन से कहा पैसे की धुन लागी रे पैसे की धुन सयंम की धुन लागी रे सयंम की धुन..
आज की धर्म सभा मे किशनगढ़ श्री संघ से श्रावक श्राविकाऐ उपस्थित रहे।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

