महासमुंद(अमर छत्तीसगढ़) 29 जुन । जिले के बागबाहरा विकासखंड से सरकारी व्यवस्था की एक चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है। ग्राम बाघामुड़ा निवासी बुजुर्ग किसान जीवनलाल साहू को सरकारी दस्तावेजों में मृत दर्ज कर दिया गया है, जबकि वे पूरी तरह जीवित हैं। इस गलती के कारण उन्हें न केवल खाद मिलने में परेशानी हो रही है, बल्कि कई सरकारी सुविधाओं का लाभ भी प्रभावित हो गया है।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब जीवनलाल साहू खेती के लिए खाद लेने स्थानीय सहकारी समिति पहुंचे। आधार सत्यापन के दौरान सिस्टम में उनका आधार निष्क्रिय दिखाई दिया। स्क्रीन पर संदेश आया कि उन्हें मृत घोषित किए जाने के कारण आधार कार्ड बंद कर दिया गया है। इसके बाद समिति ने उन्हें खाद देने से इनकार कर दिया।
खेती के महत्वपूर्ण सीजन के बीच जीवनलाल साहू अब अपनी पहचान साबित करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि वे राशन दुकान, सहकारी केंद्र और विभिन्न विभागों के दफ्तरों में कई बार जा चुके हैं, लेकिन कहीं भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। हर जगह उन्हें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजा जा रहा है।

अपनी व्यथा बताते हुए बुजुर्ग किसान भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि वे जीवित हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दिखा दिया गया है। अब उन्हें हर जगह यह साबित करना पड़ रहा है कि वे वास्तव में जिंदा हैं।
परिजनों के अनुसार आधार निष्क्रिय होने के कारण खाद मिलने में दिक्कत आ रही है और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी प्रभावित हो रहा है। परिवार कई दिनों से अधिकारियों से संपर्क कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
यह घटना सरकारी रिकॉर्ड प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर किस स्तर पर हुई गलती के कारण एक जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया गया। साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि आधार को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया किन आधारों पर पूरी की गई।
फिलहाल जीवनलाल साहू प्रशासन से केवल इतनी मांग कर रहे हैं कि सरकारी रिकॉर्ड में उनकी पहचान बहाल की जाए, ताकि वे खेती-किसानी का काम जारी रख सकें और सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में कितनी जल्दी सुधारात्मक कार्रवाई करता है और जिम्मेदार लोगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

