बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 30 जुन । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड में कार्यरत एलबी संवर्ग के सात शिक्षकों और व्याख्याताओं की क्रमोन्नत वेतनमान संबंधी याचिकाओं को निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर हाईकोर्ट पूर्व में अपना रुख स्पष्ट कर चुका है, इसलिए वर्तमान याचिकाओं में हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं बनता।
मामला कुरुद विकासखंड के विभिन्न शासकीय विद्यालयों में पदस्थ शिक्षकों एवं व्याख्याताओं से संबंधित था। याचिकाकर्ताओं में यशोदा साहू, सरिता चंद्राकर, ओमकुमारी कंवर, झबलेश्वरी साहू, मनीष देव वर्मा, छोटेलाल टांडी और पूनम अग्रवाल शामिल हैं। सभी ने अधिवक्ता अंकुश सोनी के माध्यम से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाओं में राज्य शासन के 10 मार्च 2017 के परिपत्र के आधार पर क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ नहीं दिए जाने के निर्णय को चुनौती दी गई थी। शिक्षकों का कहना था कि निर्धारित सेवा अवधि पूरी करने के बाद उन्हें उच्चतर वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए।
सभी मामलों में तथ्य और कानूनी प्रश्न समान होने के कारण अदालत ने एक साथ सुनवाई की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पैनल अधिवक्ता अपूर्वा निगम ने दलील दी कि एलबी संवर्ग के कर्मचारियों को क्रमोन्नत वेतनमान देने का मुद्दा पहले ही हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा तय किया जा चुका है।
राज्य पक्ष ने ‘आभा नामदेव बनाम छत्तीसगढ़ राज्य’ तथा ‘पुष्पलता मानिकपुरी बनाम छत्तीसगढ़ राज्य’ मामलों में दिए गए फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि 2017 के परिपत्र के तहत एलबी संवर्ग के शिक्षकों का दावा मान्य नहीं है।
अदालत ने अपने आदेश में माना कि वर्तमान याचिकाएं पूर्व में निपटाए गए मामलों के समान हैं और उन फैसलों के सिद्धांत इस मामले पर भी लागू होते हैं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सातों शिक्षकों की क्रमोन्नत वेतनमान संबंधी सभी रिट याचिकाएं खारिज कर दीं।

