नम्रता सहनशीलता प्रेम पूर्वक व्यवहार करने से मनुष्य तो क्या देव भी बस मे हो सकते है – महासती श्री पराग श्री जी

नम्रता सहनशीलता प्रेम पूर्वक व्यवहार करने से मनुष्य तो क्या देव भी बस मे हो सकते है – महासती श्री पराग श्री जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 8 जुलाई।
आचार्य श्री रामेश व उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी म सा की विशेष कृपा से समता भवन मे लगातार नैतिकता पर प्रवचन चल रहा है शासन दीपिका श्री पराग श्री जी म सा ने कहा विध्वान ज्ञानी मे क्या अंतर है विध्वान स्वंय को नही जानता सिर्फ दुसरो को जानता है और ज्ञानी स्वंय को जानने के साथ दुसरे को जानता है।
म सा ने कहा नम्रता सहनशीलता प्रेम पूर्वक व्यवहार करने से मनुष्य तो क्या देव भी बस मे हो सकते है।आज परिवार मे छोटी छोटी बातो मे अहंकार होने से कर्मो का बंधन करते जा रहे है। इस अहँकार की वजह से जीवन मिट्टी मे मिला दिया जिंदगी असफल बन गयी।
म सा ने कहा जीवन मे नम्रता है तो बहुत कुछ कर पायेंगे जो अकडता है वह खाली होता जाता है झुकते रहना चाहिए। जिसका ह्रदय सरल स्वभाव वाला होता है वह धन का अधिकारी होता हैं।

अपने स्वभाव को इगो नही बनावें।नम्रता और स्नेह से मनुष्य तो क्या देवताओ को बस मे किया जा सकता है, आज व्यक्ति परिवार को छोड बाहर वालो से प्रेम अधिक करने लगा।


म सा ने कहा जो दुसरे को छल कपट से ठगता है वो नरक मे उछलता रहता है, जन्मो जन्मो तक भव भव मे गोते लगाता रहेगा।भजन से कहा अरिहंत शरणं आनंदम, सिद्धे शरणं आनंदम साहू शरणं आनंदम बढते चलो चलते चलो सदभावो के फूल खिलते चले..
इससे पहले श्री प्रखर श्रीजी म सा ने कहा खाता खुलेगा कर्मो का सुन सुध कर एक दिन रोयेगा हमे इस जीवन मे मिश्री बनकर रहना है और मिश्री बनकर जाना है। आत्माओ को पुदगलो का निमित मिलता गया जैसा पुदगल वैसा कर्मबंध किसी ने जगा दिया तो किसी ने कर्मबंध करवा दिया।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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