बिलासपुर (अमर छत्तीसगढ़) 8 जुलाई। अपराध क्रमांक 563/2025 धारा 420, 465, 466, 468, 471, 304, 34 भा.द.वि. (वर्तमान में भारतीय न्याय संहिता के समतुल्य प्रावधान) तथा मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान अधिनियम की धारा 24 के प्रकरण में अपोलो अस्पताल प्रबंधन एवं डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेन्द्र जॉन कैम के संबंध में की गई विवेचना तथा क्लोजर रिपोर्ट के संबंध में पुलिस की कार्यवाही ।
- प्रकरण की पृष्ठभूमि
दिनांक 09.04.2025 को डॉ. प्रदीप शुक्ला द्वारा थाना सरकण्डा में आवेदन प्रस्तुत कर आरोप लगाया गया कि उनके पिता स्व. पं. राजेन्द्र प्रसाद शुक्ला का वर्ष 2006 में अपोलो अस्पताल, बिलासपुर में उपचार किया गया था। उपचार के दौरान डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव द्वारा एंजियोग्राफी एवं एंजियोप्लास्टी की गई, जिसके पश्चात उनकी मृत्यु हो गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि संबंधित चिकित्सक योग्य एवं पंजीकृत हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं थे तथा अस्पताल प्रबंधन ने बिना समुचित सत्यापन के उन्हें नियुक्त किया था।
- विवेचना के दौरान की गई जांच
प्रकरण की जांच के दौरान निम्नलिखित संस्थाओं एवं अभिलेखों से जानकारी प्राप्त की गई–
- मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बिलासपुर।
- अपोलो अस्पताल, बिलासपुर।
- पुलिस अधीक्षक, दमोह (मध्यप्रदेश)।
- छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल।
- उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज।
- अन्य संबंधित संस्थान एवं अस्पताल।
जांच में यह पाया गया कि वर्ष 2006 में डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव अपोलो अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में कार्यरत थे। अस्पताल द्वारा उनका बायोडाटा (Resume/CV) तथा नियुक्ति आदेश उपलब्ध कराया गया, जबकि उनकी शैक्षणिक डिग्री एवं मेडिकल काउंसिल पंजीयन से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं ।
- आरोपी चिकित्सक के संबंध में प्राप्त तथ्य
विवेचना के दौरान निम्न महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए—
- आरोपी ने स्वयं को MBBS, MRCP तथा इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी में फेलोशिप धारक बताया था।
- मेडिकल काउंसिल से प्राप्त जानकारी के अनुसार उसका वैध पंजीयन प्रमाणित नहीं हुआ जो नरेंद्र जहाँ केम के नाम से है ।
- दमोह पुलिस द्वारा दर्ज अपराध में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ने फर्जी नाम “नरेन्द्र जॉन कैम” से आधार कार्ड, पैन कार्ड एवं अन्य दस्तावेज तैयार कराए थे।
- उसके द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां पाई गईं।
- उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज से प्राप्त सूचना के अनुसार आरोपी के नाम पर MBBS की वैध डिग्री जारी होने का रिकॉर्ड हमारी जांच में उपलब्ध नहीं मिला।
- अन्य पीड़ितों के आवेदन
- आरोपी की गिरफ्तारी एवं पूछताछ
दमोह में दर्ज अपराध के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया तथा प्रोडक्शन वारंट पर बिलासपुर लाकर पुलिस रिमांड पर पूछताछ की गई।
पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि—
- वह अपोलो अस्पताल, बिलासपुर में Consultant Cardiologist के रूप में कार्यरत था।
- उसने अनेक मरीजों की एंजियोग्राफी एवं एंजियोप्लास्टी की थी।
- मेडिकल योग्यता संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिए जाने के बावजूद वह अपनी एमबीबीएस की डिग्री के शिवाय नरेंद्र जॉन केएम के नाम का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका। यदपि आरोपी ने अपोलो हॉस्पिटल में नरेंद्र विक्रमादित्य यादव के मान से नियुक्ति ली थी ।
- विवेचना में प्राप्त निष्कर्ष
संपूर्ण विवेचना से निम्न तथ्य स्थापित हुए—
- आरोपी चिकित्सा विशेषज्ञ अथवा विधिवत विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट नहीं था शिवाय एमबीबीएस डिग्रीधारी के ।
- उसने कूटरचित दस्तावेजों एवं फर्जी पहचान का उपयोग कर अस्पताल में नियुक्ति प्राप्त की।
- उसने अनेक मरीजों का हृदय संबंधी उपचार किया।
- जांच के अनुसार उसके कार्यकाल के दौरान उपचारित लगभग 27 मरीजों की मृत्यु होने की जानकारी सामने आई जिसकी पुष्टि के प्रमाणित कोई पीड़ित अथवा दस्तावेज नहीं मिले केवल दो पीड़ित लालच ने शिकायत दर्ज कराई थी ।
- उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध अभियोग पत्र क्रमांक 671/2025 दिनांक 27.06.2025 न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
- अस्पताल प्रबंधन एवं चयन समिति के संबंध में पृथक जांच
अभियोग पत्र प्रस्तुत करने के उपरांत धारा 173(8) दंड प्रक्रिया संहिता (आगे की विवेचना) के अंतर्गत अस्पताल प्रबंधन एवं चयन समिति की संभावित संलिप्तता की जांच जारी रखी गई।
इस दौरान—
- अपोलो अस्पताल से पुनः पत्राचार किया गया।
- डॉ. बी.आर. प्रेम कुमार से जानकारी प्राप्त की गई।
- नियुक्ति संबंधी उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण किया गया।
- वर्ष 2006 के रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।
- अपोलो अस्पताल का स्पष्टीकरण
अस्पताल प्रबंधन ने लिखित रूप से बताया कि—
- नियुक्ति लगभग 17–18 वर्ष पूर्व हुई थी।
- उस समय अभिलेख केवल हार्ड कॉपी में रखे जाते थे।
- रिकॉर्ड संरक्षण की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पुराने अभिलेख नष्ट हो गए अथवा उपलब्ध नहीं हैं।
- इसलिए नियुक्ति संबंधी अतिरिक्त दस्तावेज उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
- विधिक राय
संपूर्ण केस डायरी का परीक्षण करने के पश्चात—
- वरिष्ठ अधिकारियों,
- जिला अभियोजन अधिकारी, बिलासपुर विधिक राय दी गई।
राय में यह उल्लेख किया गया कि उपलब्ध समस्त साक्ष्यों के परीक्षण से ऐसा कोई ठोस प्रमाण प्राप्त नहीं हुआ जिससे यह सिद्ध हो सके कि अपोलो अस्पताल प्रबंधन अथवा चयन समिति ने जानबूझकर, दुर्भावनापूर्ण अथवा आपराधिक षड्यंत्र के तहत आरोपी चिकित्सक की नियुक्ति की थी।
अर्थात उपलब्ध साक्ष्य अस्पताल प्रबंधन की सक्रिय आपराधिक संलिप्तता सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं पाए गए।
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अंतिम निष्कर्ष
संपूर्ण विवेचना से निम्न निष्कर्ष सामने आए—
- डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेन्द्र जॉन कैम के विरुद्ध फर्जी दस्तावेजों, कूटरचना, धोखाधड़ी तथा अवैध रूप से चिकित्सकीय कार्य करने के पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त हुए।
- आरोपी के विरुद्ध विधिवत अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है।
- अस्पताल प्रबंधन एवं चयन समिति की भूमिका की पृथक विवेचना भी की गई।
- उपलब्ध अभिलेखों, पत्राचार, गवाहों के कथनों एवं विधिक राय के आधार पर अस्पताल प्रबंधन अथवा चयन समिति के विरुद्ध आपराधिक षड्यंत्र अथवा जानबूझकर की गई संलिप्तता सिद्ध करने योग्य कोई ठोस साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ फलस्वरूप अपोलो अस्पताल प्रबंधन एवं डॉ. बी.आर. प्रेम कुमार के विरुद्ध साक्ष्य के अभाव में माननीय न्यायालय के समक्ष क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जबकि आरोपी चिकित्सक के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही पृथक रूप से जारी रखी गई।

