परिस्थिति केसी हो अपना आत्मविश्वास मजबूत करके आगे बढते हुए नया मार्ग बना देना चाहिए- महासती श्री पराग श्री जी

परिस्थिति केसी हो अपना आत्मविश्वास मजबूत करके आगे बढते हुए नया मार्ग बना देना चाहिए- महासती श्री पराग श्री जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 12 जुलाई ।
आचार्य श्री रामेश व उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी म सा की विशेष कृपा से समता भवन मे लगातार नैतिकता पर प्रवचन चल रहा है शासन दीपिका श्री पराग श्री जी म सा ने कहा तीन तरह के व्यक्ति को याद रखना चाहिए जो मुसीबतों मे काम आये, जो मुसीबतों मे डाल दे व मुसीबतों मे छोड दे आचार्य नानेश कहते थे जो होता अच्छे के लिए होता है, अपने लक्ष्य को निश्चित रखे अपने लक्ष्य को निर्धारित करके आत्मविश्वास को जगाये तभी हमारा काम पूरा होगा।


म सा ने बताया जिस बच्चो का आत्मविश्वास डावाडोल हो जाय तो उसका मन पढाई मे नही लगेगा ऐकाग्रता की नही रह पायेगी आंखे किताब मे मन बाहर होगा इसलिए वह पास नही हो पाता क्योंकि बाहर की परिस्थिति मे आत्मविश्वास डोल जाता है, ऐसी परिस्थिति मे आत्मविश्वास को जगाने में बच्चे की सहायता करनी चाहिए और उसे आगे बढाते रहे तीर्थंकर भगवान यही कहते थे आगे बढने के लिए आत्मविश्वास को जगाये रखे।परिस्थिति का रोना नही रोये इसकी चुनोती स्वीकार करके आगे का रास्ता बनाना चाहिए।


म सा ने कहा हमे परिस्थिति यथार्थ बोध करे अनुकूल परिस्थिति हो या प्रतिकूल परिस्थिति का निर्माण हमारे हाथ मे होता है परिस्थिति मेढक के समान होती है जो उछल कूद करती रहती है। उत्साह वह शक्कर है जो कार्य रुपी चाय को मिठ्ठा बना देती है, अपने आप को कार्य के प्रति समर्पित करे जहां अर्पण वहां समर्पण है, गुरुद्वारा मे प्रवेश करने से पहले अपनी समझ को बाहर रख दे गुरू के चरणो मे सर रख दे उनकी आज्ञा मे चलने वाला निहाल हो जाता,गुरू के लिए अपने आप को कुर्बान कर देना चाहिए।


इससे पहले महासती श्री प्रखर श्रीजी म सा ने कहा प्रभु महावीर का अनंत अनंत उपकार रहा हमे नयी दिशा दी इसलिए हम भटक नही सके हमे विकल्प मे नही उलझ कर सकंल्प मे आगे बढते रहना चाहिए, अब चातुर्मास आ रहा है संकल्प के साथ तपस्या मे आगे बढते रहे।।


म सा ने कहा पुदगलो की आसक्ति छोडे नही तो वह तपस्या मे आगे बढने नही देगी, संकल्प विकल्प पुदगलो का सहयोगी रहा इनके सहयोग मे प्रभावित नही होना चाहिए। पुदगलो से लगाव कम रखे पुदगलो का सुख हमारी आत्मा को गिराने वाला होता है, देवगति मे पुदगलो का सुख ही सुख है क्योंकि उनकी आसक्ति बढती जाती है।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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