बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 18 जुलाई । महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मितानिनों को गुणवत्ता विहीन साड़ियां बांटे जाने का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि अब शहर की स्वच्छता दीदियों को वितरित किए गए रैनकोट की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वच्छता कर्मियों का आरोप है कि बारिश से बचाव के लिए दिए गए रैनकोट इतने पतले और कमजोर हैं कि कुछ ही बार पहनने पर फटने की स्थिति में पहुंच जाते हैं।
स्वच्छता दीदियों का कहना है कि उन्हें दिए गए रैनकोट की गुणवत्ता बेहद खराब है। उनका दावा है कि इस्तेमाल में आने वाले साधारण प्लास्टिक की पन्नी भी इन रेनकोट से अधिक मजबूत प्रतीत होती है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि रैनकोट की कीमत उनके भुगतान से काटी जाएगी, जिससे उनमें नाराजगी बढ़ गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले मितानिनों को वितरित की गई साड़ियों की गुणवत्ता को लेकर भी बड़ा विवाद सामने आया था। शिकायत थी कि साड़ियां पहली धुलाई में ही रंग छोड़ने लगीं और उनका आकार भी छोटा हो गया। इस मामले ने प्रदेश की राजनीति में भी काफी हलचल मचाई थी।
अब स्वच्छता दीदियों को दिए गए रैनकोट को लेकर एक बार फिर सरकारी खरीद प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि उन्हें बारिश में काम करना है तो कम से कम सुरक्षित और टिकाऊ सामग्री उपलब्ध कराई जानी चाहिए। वहीं पूरे मामले में जिम्मेदार विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

