रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 1 अगस्त । छत्तीसगढ़ सरकार ने आम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य पदार्थों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की घोषणा के बाद राज्य में अमानक पनीर एवं डेयरी एनालॉग उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी कर दिया गया है।
जारी आदेश के अनुसार, ऐसे उत्पाद जिनमें दूध की जगह वनस्पति वसा (Vegetable Fat) या वनस्पति तेल (Vegetable Oil) का उपयोग कर उन्हें पनीर या डेयरी उत्पाद के रूप में भ्रामक तरीके से बेचा जाता है, उन पर अब रोक रहेगी। सरकार का कहना है कि ऐसे उत्पाद उपभोक्ताओं को भ्रमित करते हैं और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं हैं।
आदेश के तहत राज्यभर में एनालॉग पनीर सहित प्रतिबंधित श्रेणी के डेयरी उत्पादों का निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री तत्काल प्रभाव से बंद रहेगी। खाद्य सुरक्षा विभाग को इस संबंध में सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि, आदेश में स्पष्ट किया गया है कि फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज़ और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे उत्पाद इस प्रतिबंध के दायरे में नहीं आएंगे, क्योंकि इनके लिए अलग खाद्य मानक निर्धारित हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यह आदेश एक वर्ष की अवधि तक अथवा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा डेयरी एनालॉग उत्पादों को लेकर अंतिम नियम लागू होने तक प्रभावी रहेगा।
राज्य सरकार का मानना है कि इस निर्णय से उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित डेयरी उत्पाद उपलब्ध होंगे तथा भ्रामक खाद्य उत्पादों की बिक्री पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

