मन की प्रकृति सुधरने से बाहर की प्रकृति स्वतः सुधर जाएगी : भ्राता भारत भूषण

मन की प्रकृति सुधरने से बाहर की प्रकृति स्वतः सुधर जाएगी : भ्राता भारत भूषण

राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) , 4 अगस्त। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के साइंटिस्ट, इंजीनियर्स एवं आर्किटेक्ट प्रभाग द्वारा ज्ञान मानसरोवर, राजनांदगांव में3अगस्त सोमवार शाम को आयोजित पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन विषयक कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आंतरिक चेतना के विकास का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में पानीपत से पधारे प्रख्यात राजयोगी भ्राता भारत भूषण जी ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि आज मानव ने अपने स्वार्थ और भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ में प्रकृति का अत्यधिक दोहन किया है। इसका परिणाम यह है कि वही प्रकृति अब विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन के रूप में मानव को कष्ट पहुँचा रही है।

उन्होंने कहा कि केवल वृक्षारोपण, जल संरक्षण या प्रदूषण नियंत्रण जैसे बाहरी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। यदि मनुष्य वास्तव में प्रकृति से सुख, शांति और संतुलन प्राप्त करना चाहता है तो उसे सबसे पहले अपने मन और स्वभाव की प्रकृति को बदलना होगा। जब मन की प्रकृति पवित्र, सकारात्मक और संतुलित होगी, तब बाहर की प्रकृति भी स्वतः संतुलित होने लगेगी। उन्होंने बताया कि मनुष्य के विचार, संस्कार और कर्म ही समाज तथा पर्यावरण की दिशा निर्धारित करते हैं। इसलिए पर्यावरण संरक्षण का वास्तविक आधार आध्यात्मिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों का विकास है।

कार्यक्रम में दिल्ली से पधारे राजयोगी भ्राता पीयूष जी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में विज्ञान और आध्यात्मिकता का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल तकनीकी उपायों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि मानसिक दृढ़ता, सकारात्मक सोच और आत्मबल का विकास भी इसका महत्वपूर्ण अंग है। राजयोग ध्यान के माध्यम से व्यक्ति स्वयं को तनावमुक्त, सशक्त और परिस्थितियों का सामना करने योग्य बना सकता है।
हैदराबाद से पधारी
राजयोगिनी अंजली दीदी ने भी उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए पर्यावरण संरक्षण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, संयमित जीवनशैली और आध्यात्मिक मूल्यों का पालन ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण का आधार बन सकता है।

उन्होंने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास भी कराया, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर गया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में सेवाकेंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी पुष्पा दीदी जी ने अपने प्रेरणादायी शब्दों से सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी से प्रकृति के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का भाव विकसित करने का आह्वान किया।

इसी श्रृंखला में सोमवार को शहर के चार प्रमुख संस्थानों—डेंटल कॉलेज, नगर निगम, एबीस फैक्ट्री तथा कमल साल्वेंट—में भी पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं नागरिकों ने भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण तथा आध्यात्मिक जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जब मनुष्य अपने विचारों, व्यवहार और जीवन मूल्यों में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा, तभी प्रकृति के साथ उसका संबंध संतुलित और सुखद बन सकेगा। मुख्य अतिथि डोंगरगांव विधायक भ्राता दलेश्वर साहू जी ने इस कार्यक्रम की भूरि भूरि प्रशंसा की ।

अभियंता संघ के अध्यक्ष इंजीनियर राजेश साहू ने भी अपनी शुभकामनायें व्यक्त की।नन्हीं बालिका शिवांशी ने स्वागत नृत्य किया।माउंट आबू से पधारे धनन्जय भाई ने पर्यावरण संरक्षण के लिये शपथ दिलाया।कार्यक्रम संचालन ब्रह्माकुमारी प्रभा बहन जी ने किया।

इस अवसर पर इंजीनियर महेन्द्र साहू,विनोद पाण्डे,संजीव देवांगन,तरुण साहू,राकेश ठाकुर,अमलेन्दु हाजरा,प्रो कृष्णकुमार द्विवेदी,पार्षद शिव वर्मा पार्षद प्रियन्का कुरुंजरेकर,दिनेश भट्टर सहित अनेकअनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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