बिलासपुर(अमर छत्तीसगढ़) 5 अगस्त । छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी, जैसे विवाह पंजीयन आवेदन, जन्मतिथि, पहचान पत्र और अन्य व्यक्तिगत दस्तावेज, किसी तीसरे पक्ष को आरटीआई के तहत उपलब्ध नहीं कराए जा सकते। कोर्ट ने कहा कि ऐसी जानकारी तभी दी जा सकती है, जब उससे जुड़ा कोई बड़ा जनहित साबित हो।
जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए दो याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि आरटीआई अधिनियम का उद्देश्य शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, लेकिन अधिनियम की धारा 8(1)(जे) के तहत नागरिकों की निजता की सुरक्षा भी समान रूप से महत्वपूर्ण है।
यह है मामला
अंबिकापुर निवासी डी.के. सोनी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सूरजपुर जिले के अपर कलेक्टर एवं विशेष विवाह अधिकारी के समक्ष कपिल देव पैकरा और लवकेश कुमार पैकरा द्वारा प्रस्तुत विवाह पंजीयन आवेदन, उससे जुड़े दस्तावेज, आदेश और इश्तहार की प्रमाणित प्रतियां आरटीआई के तहत मांगी थीं।
हालांकि, जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी ने यह कहते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया कि आवेदक तीसरा पक्ष (थर्ड पार्टी) है और मामला न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा होने के कारण जानकारी नहीं दी जा सकती। इसके बाद राज्य सूचना आयोग ने भी 10 अक्टूबर 2019 को द्वितीय अपील खारिज करते हुए अधिकारियों के निर्णय को सही ठहराया था। आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट का रुख किया।
कोर्ट ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि विवाह पंजीयन आवेदन में नाम, पता, फोटो, जन्मतिथि और पहचान पत्र जैसे संवेदनशील व्यक्तिगत विवरण शामिल होते हैं। यदि आवेदक किसी बड़े जनहित, जैसे भ्रष्टाचार का खुलासा या पद के दुरुपयोग को साबित नहीं कर पाता, तो ऐसी जानकारी सार्वजनिक करना व्यक्ति की निजता का अनावश्यक उल्लंघन होगा।
इन्हीं तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने दोनों याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा कानून के तहत सुनिश्चित की गई है और बिना पर्याप्त जनहित के उसे तीसरे पक्ष को उपलब्ध नहीं कराया जा सकता।

