आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026… सही चिंतन और मैत्री भाव से जीवन को मिलती है नई दिशा : साध्वी मंजुलाश्रीजी

आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026… सही चिंतन और मैत्री भाव से जीवन को मिलती है नई दिशा : साध्वी मंजुलाश्रीजी

रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 5 अगस्त । आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशलसूरि जैन दादाबाड़ी में अध्यात्मसार ग्रंथ के ‘चिंतन’ अध्याय पर प्रवचन देते हुए पूज्य साध्वी मंजुलाश्रीजी महाराज साहिबा ने कहा कि यदि चिंतन और मनन सही दिशा में किया जाए तो मनुष्य जीवन की ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि हमारे मन में यह भाव हो कि हमारी अपेक्षाएं पूरी हों या न हों, लेकिन हमारे द्वारा दूसरों की अपेक्षाएं अवश्य पूरी हों, तो यही सच्चा मैत्री भाव है। सम्यक दर्शन की प्राप्ति होने पर जीवन में मैत्री और करुणा का स्वाभाविक उदय होता है।

साध्वीश्री ने कहा कि जब किसी कार्य के प्रति दृढ़ भाव जागृत हो जाता है, तब वह कार्य कितना भी कठिन क्यों न हो, सहज रूप से पूर्ण हो जाता है। सफलता का मूल आधार बाहरी परिस्थितियां नहीं, बल्कि मन के सकारात्मक भाव होते हैं।

प्रवचन के दौरान उन्होंने एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि एक संत भ्रमण करते हुए एक नगर पहुंचे। नगरवासियों ने उनका स्वागत किया और कुशलक्षेम पूछने के बाद संत ने उनसे प्रश्न किया कि उनके नगर का सबसे श्रेष्ठ व्यक्ति कौन है। सभी ने एक स्वर में उत्तर दिया—’झाड़ू लगाने वाली महिला।’ संत को आश्चर्य हुआ। नगरवासियों ने बताया कि वह सदैव प्रसन्न रहती है, सभी से मधुर व्यवहार करती है और नियमित रूप से समाधि का अभ्यास करती है।

यह सुनकर संत ने उससे मिलने की इच्छा व्यक्त की। जब वह महिला संत के पास पहुंची तो उन्होंने पूछा कि समाधि के लिए क्या करना पड़ता है। महिला ने सहज भाव से उत्तर दिया, “समाधि के लिए कुछ नहीं करना पड़ता।” इस प्रसंग की व्याख्या करते हुए साध्वी मंजुलाश्रीजी ने कहा कि जहां मन की चंचलता समाप्त हो जाती है और भीतर पूर्ण शांति का अनुभव होता है, वहीं से समाधि का आरंभ होता है। वास्तविक उन्नयन भी इसी अवस्था से प्रारंभ होता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से सही चिंतन, मैत्री भाव, मधुर व्यवहार और आत्मचिंतन को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यही मार्ग व्यक्ति को आत्मिक उन्नति और मोक्ष की ओर अग्रसर करता है।

नौ उपवास पूर्ण करने पर प्राची झाबक का सम्मान, 125 तपस्वियों ने किया पारणा

आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशलसूरि जैन दादाबाड़ी में धार्मिक उल्लास के साथ तप आराधना के विभिन्न कार्यक्रम संपन्न हुए। इस अवसर पर नौ उपवास पूर्ण करने वाली प्राची झाबक का श्रीसंघ की ओर से सम्मान किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनकी तपस्या की सराहना करते हुए मंगलकामनाएं दीं।

इसी क्रम में दादाबाड़ी में आयोजित 48 दिवसीय सम्मेत शिखर महातीर्थ तप के तहत 125 तपस्वियों ने विधि-विधान के साथ पारणा किया। तपस्वियों ने संयम, आराधना और आत्मशुद्धि की भावना के साथ अपनी साधना को आगे बढ़ाया।

पूज्य मंजुलाश्रीजी म.सा. के पावन सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। धर्मसभा में तप, संयम और आत्मकल्याण के महत्व पर प्रकाश डाला गया तथा तपस्वियों का श्रीसंघ द्वारा अभिनंदन किया गया।

इस अवसर पर श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति के अध्यक्ष बसंत लोढ़ा, महासचिव मुकेश निमाणी, सह-सचिव अभिषेक गोलछा, कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित समिति के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

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