रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 7 अगस्त । आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशलसूरि जैन दादाबाड़ी में अध्यात्मसार ग्रंथ का पाठ करते हुए शुक्रवार को पूज्य साध्वी मंजुलाश्रीजी महाराज साहिबा ने कहा कि आज के समय में समाज से सबसे तेजी से यदि कोई गुण समाप्त हो रहा है, तो वह कृतज्ञता का भाव है। जब व्यक्ति अपने जीवन में किए गए उपकारों को भूलने लगता है, तब उसके भीतर विनय, विवेक और सद्गुण भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं।
साध्वीश्री ने कहा कि आज अनेक परिवारों में देखने को मिलता है कि बच्चों में माता-पिता के प्रति पहले जैसी श्रद्धा, सम्मान और आज्ञाकारिता नहीं रही। जिस माता-पिता ने जन्म दिया, पालन-पोषण किया, अपनी इच्छाओं का त्याग कर बच्चों का भविष्य संवारने में पूरा जीवन लगा दिया, वही संतान कभी-कभी उनके साथ ऐसा व्यवहार कर बैठती है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। कई बार बच्चे ऐसे कठोर शब्द बोल देते हैं, जिनका विचार भी मन में नहीं आना चाहिए। यह संस्कारों के क्षरण का संकेत है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को सदैव यह स्मरण रखना चाहिए कि जीवन में जो कुछ भी प्राप्त हुआ है, उसमें माता-पिता का सबसे बड़ा योगदान होता है। इसलिए उनके प्रति सम्मान, सेवा और कृतज्ञता का भाव बनाए रखना प्रत्येक संतान का प्रथम धर्म है। यदि परिवार में विनय और संस्कार होंगे, तो समाज स्वतः ही संस्कारित बन जाएगा।
साध्वी मंजुलाश्रीजी ने कहा कि माता-पिता जब वृद्धावस्था में पहुंचते हैं, तब उन्हें धन या वैभव से अधिक अपने बच्चों के प्रेम, सम्मान और सहारे की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में बच्चों का कर्तव्य है कि वे उनके बुढ़ापे की सहारे की लाठी बनें, न कि उन्हें पीड़ा देने का कारण। उन्होंने कहा कि माता-पिता की सेवा केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि धर्म और आत्मकल्याण का भी श्रेष्ठ मार्ग है।

प्रवचन के अंत में साध्वीश्री ने श्रद्धालुओं से अपने परिवारों में बच्चों को बचपन से ही विनय, सेवा, कृतज्ञता और संस्कारों की शिक्षा देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों में माता-पिता का सम्मान होता है, वहां सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है तथा वही संस्कार समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव बनते हैं।
इस अवसर पर श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति के अध्यक्ष बसंत लोढ़ा, महासचिव मुकेश निमाणी, सह-सचिव अभिषेक गोलछा एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजजन उपस्थित रहे।

