बलरामपुर(अमर छत्तीसगढ़) 9 अगस्त । छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितता का मामला अब चर्चा में है। राजपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयुष्मान भारत योजना के तहत की गई खरीदी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि मामले में महालेखाकार (AG) की ऑडिट के दौरान भी वित्तीय अनियमितताएं सामने आई थीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बलरामपुर कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर की ओर से जांच के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, विभागीय जांच की गति को लेकर सवाल उठ रहे हैं और अब जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में निर्धारण समिति की विधिवत बैठक और अनुमोदन के बिना लाखों रुपये की खरीदी किए जाने की बात सामने आई है।
सरकारी राशि से किसी भी प्रकार की खरीदी के लिए निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन जरूरी होता है। ऐसे में यदि जांच में बिना आवश्यक अनुमोदन के खरीदी की पुष्टि होती है तो सरकारी धन के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। अब जांच में यह पता लगाया जाना महत्वपूर्ण होगा कि खरीदी का निर्णय किस स्तर पर लिया गया, भुगतान की स्वीकृति किसने दी और पूरी प्रक्रिया में किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका रही। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि महालेखाकार की ऑडिट में वित्तीय अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
वहीं, मामले से जुड़े कुछ लोगों की ओर से जांच की धीमी गति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि जांच लंबी खिंचने से संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत मिल रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अंतिम स्थिति जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब पूरे मामले में जांच दल की रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच रिपोर्ट में केवल प्रक्रियागत कमियों का उल्लेख किया जाएगा या फिर जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। यदि जांच निष्पक्ष तरीके से होती है तो खरीदी से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया की जांच कर वास्तविक जिम्मेदारों की पहचान की जा सकती है। वहीं, यदि केवल औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर मामला समाप्त किया जाता है, तो विभागीय जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
पूरे मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकारी राशि से की गई खरीदी के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी। समिति का अनुमोदन हुआ या नहीं, सामान की जरूरत का निर्धारण किसने किया, खरीदी किससे की गई, भुगतान किस अधिकारी ने स्वीकृत किया और सामान वास्तव में स्वास्थ्य केंद्र को प्राप्त हुआ या नहीं- इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है।
फिलहाल बलरामपुर कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर के निर्देश के बाद जांच प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच रिपोर्ट कब सामने आती है और उसमें वित्तीय अनियमितता के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

