ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 9 augi
आचार्य श्री रामेश के शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज सुबह खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे अपनी अमृत देशना देते हुए कहा हुक्मसंघ के उदयवान नक्षत्र आचार्य भगवन और बहुश्रुत वाचनाचार्य को वंदन नमन करते हुए खून के रिश्त गहरे कैसे होते है पर बताया जैसे बीज रोपेंगे वैसा फल ही मिलेगा,जैसे संस्कारो का बीजारोपण करेगे वो फल संस्कारो वाला मिलेगा।संस्कारी व्यक्ति खून के रिश्ते को समझ सकता हैं।
म सा ने कहा आज घर,परिवार मे संघ समाज मे संस्कारो की कमी से हमारे युवा बच्चे भटकते जा रहे हे कुव्यसनो मे गिरते जा रहे हैं,रहन सहन की वजह से अच्छे संस्कारो का आचरण नही कर पा रहे है, आज हर घर घर की यही कहानी बनती जा रही हैं, और रिश्ते को तार तार करते जा रहें हैं।
म सा ने बताया अपने बच्चों को गर्भ से ही अच्छे संस्कार मिलेगा तो बच्चा संस्कारी ही बनेगा मां बाप की आज्ञा मे चलेगा, संस्कारित परिवार का बच्चा चारित्र संस्कार वाला होगा, धर्म को समझने वाला होगा जिस परिवार की पीढी 49 सालो से निष्कलंकित होती उस परिवार मे तीर्थकर का जन्म होता व जिसकी सात पीढी निष्कलंकित होगी उस परिवार मे आचार्य उपाध्याय का जन्म होता है।
म सा ने बताया बिना संस्कारी लडकी नही लानी चाहिए नही उसकी मति भ्रमित होने से पूरा परिवार को खत्म करा देती है,रिश्ते को तार तार कर देती है,पहले लडका लडकी के गुण मिलाते थे आज खून मिलाते है,पानी का मंथन से मक्खन नही मिलता दही का मंथन करने पर ही मक्खन मिल पाता है इसी प्रकार संस्कारित परिवार से संस्कारी बच्चे निकलते है जो मक्खन से समान होते है।
म सा ने कहा हमारे बच्चो को अपना जैसा नही बनाकर उनके प्रति यही भावना हो जल्दी दीक्षा लेकर आत्मा का कल्याण कर सके,आज सोना चांदी जीवन को समाप्त करने वाला बनता जा रहा है, इसी प्रकार अधर्मी व्यक्ति अनर्थ का कारण बनता जा रहा पाप मे ढंसता जा रहा पाप छिपाया ना छिपे,छिपे तो कोरो पाप जो कभी भी प्रकट हो जायेगा।
श्रद्धेय श्री दिव्यदर्शन जी म सा ने समझाया दुष्ट व्यक्ति में कर्मो का योग जरुर आता है जिसको बरदास्त करना ही पडेगा,व्यक्ति की सोच स्वार्थी होती जा रही हैं, सोच सकारात्मक होनी चाहिए, चोट खाया व्यक्ति आत्मा का कल्याण करने मे लग जाता है, व्यक्ति का स्वभाव को अंदर से देखे बाहर से पता नही चलता।सुख दुख मे रहना एक समान होना चाहिए, अपने संस्कार को बदलर आत्मा के संस्कार मे रहना चाहिए।
म सा ने बताया ब्यावर क्षेत्र की पुण्यवाणी है जो बारह महिने संत सतिया रहती है ओर हम सभी को जिनवाणी सुनने,प्रतिक्रमण, संवर पौषध करने का मौका मिलता जाता है। हमारे आचार्य रामेश को जिनशासन चलाने के लिए सभी तरह के लोगो का सामना करना पडा जैसै भगवान महावीर को गोतम व गोशारक जैसे मिले।धर्म की सुनो कभी बेकार नही जायेगा, प्रतिक्रिया देना दुखदायी होता है।
महासती श्री पराग श्रीजी म सा ने कहा जो आत्मा अंतरमुखी बन जाती वह साधना के चरण को प्राप्त कर लेता है हमे राग द्वेष जैसे पर्दाथो से दूर रहे नही तो आत्मा से चिपक जायेगें।हमे 9 तत्व 14 नियम व 12 व्रतो को समझर फोलो करके ग्रहण करना चाहिए। आत्मा को धोने पर सिद्धि मिल पायेगी।
अंत मे श्री रामविज्ञ मुनि जी म सा ने तपस्या पर जोर देकर बताया तपस्वी साधना मे लीन रहकर कैसे आगे बढते जा रहे जैसे देशनोक के विजय राज सांड के आज 19 की तपस्या चल रही इसी तरह काफी जनो ने तेले से आगे बढते जा रहे है अंत मे सभी को प्रत्याखान लेने की प्रेरणा दी गयी।
संघ प्रवक्ता
नोरतमल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

