राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 10 अगस्त। खत्तर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने आज यहां कहा कि लोग बोलते हैं कि सच कड़वा होता है किंतु सच कड़वा नहीं होता बल्कि हमारी भाषा ही कड़वी होती है। हमें सच बोलना चाहिए किंतु मर्यादित भाषा में ताकि किसी को दुख न पहुंचे। उन्होंने कहा कि सच बोलो तो काफी अच्छा है किंतु जहां झूठ बोलने की नौबत आती है, वहां मौन रहना ही बेहतर है।
ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में आज अपने नियमित प्रवचन के दौरान मुनि श्री श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा कि हमें हमेशा सच ही बोलना चाहिए। हम दिन भर में पता नहीं कितना झूठ बोलते हैं। उन्होंने वासुदेव राजा का उदाहरण देते हुए कहा कि एक झूठ ने उन्हें सातवें नरक में पहुंचा दिया तो पता नहीं हम कितना झूठ बोलते हैं। दस में से एक झूठ ही हम मजबूरी में बोलते हैं,शेष हम अपनी इच्छा से बोलते हैं।
उन्होंने कहा कि झूठ बोलने से बचो।हमेशा सच बोलो। उन्होंने कहा कि भले ही सच कड़वा लगे लेकिन सच बोलने वाले पर लोगों का भरोसा बढ़ता है, जबकि झूठ बोलने वाला भले ही मीठा बोले किन्तु वह कभी लोगों का विश्वासपात्र नहीं बन सकता।झूठ बोलकर कर्म बंधन मत बांधिए।
मुनिश्री ने कहा कि खुद का कर्जा बढ़ाकर दूसरों का कर्ज उतार रहे हो तो यह समझदारी नहीं है। समझदारी तो इस बात पर है कि स्वयं के कर्ज के साथ-साथ यदि हम दूसरे का कर्ज भी उतारते हैं। आप सच बोलो किंतु इस तरीके से बोलो कि सामने वाले को बुरा भी न लगे और वह आपकी बात मान भी जाए। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।

