जैन धर्म वैज्ञानिक धर्म है, जीवन जीन सिखा देती- श्री विनय मुनि जी

जैन धर्म वैज्ञानिक धर्म है, जीवन जीन सिखा देती- श्री विनय मुनि जी

ब्यावर राजस्थान (अमर छत्तीसगढ़) 17 अगस्त।
आचार्य श्री रामेश के शिष्य ब्यावर रत्न शासन दीपक श्री विनय मुनि जी म.सा.ने आज सुबह खचाखच भरे समता भवन के प्रवचन हाल मे स्वतंत्रता दिवस पर अपनी अमृत देशना देते हुए आज का प्रवचन धर्म की जड़ सदा हरी भरी पर भजन से कहा आया धर्म का जोश,जोश को कायम रखो,जोश भी अकेला न हो होश को कायम रखो,काया से काम कर लो,आज से नियम रखो,.. हमें सच्चे धर्म को जाने झूठ की बात नहीं माने,आये गुरु समझाने, तत्वों को अब पहचाने।


म सा ने कहा जैन धर्म एक वैज्ञानिक धर्म है इस आधुनिक युग में जीवन जीने की प्रेरणा देता है वो हमारा वर्तमान भविष्य उज्जवल बना देता है,जीवन जीने की उपलब्धि के साथ आंनद देने वाला होता है, भविष्य उज्जवल होगा तो सोचने की जरूरत नहीं रहेगी, परलोक में सही गति मिल सकेगी।


म सा ने कहा धर्म है क्या? जो आत्मा की रक्षा करें वहीं धर्म है, धर्म का मतलब ही धर्म को समझे फिर धर्म को धारण करे क्योंकि धर्म धारण करने की चीज है, जो धर्म की रक्षा करता धर्म उसकी 24 घंटे रक्षा करता है।

हमें केवली परुपी धर्म को तीन काल तक धोका नही देना चाहिए नहीं तो इंसान की सोच नकारात्मक होती जायेगी हमें अपनी सोच सकारात्मक बनानी है।हमारी झलक सबसे अलग केवली परुपी धर्म से जुड़ने की होनी चाहिए जो हमारे घर परिवार की सुख समृद्धि बना सके।


म सा ने धर्म की जड़ क्या है? धर्म की जड़ हरी भरी कैसे बने?धर्म की जड़ दयामाता पर टिकी है जो सुख शांति की हरियाली देती है व हरियाली संत समागम से मिलती है,जो संघ समाज में एकता प्रेम से बनी रहती है,केशरी परुपी शरण की दया से अनुकम्पा करें,मुखरा क्या देख दर्पण पर तेरे दया धर्म नहीं जीवन में,दया धर्म का चिंतन करके सुख शांति का फूल खिलाना है, हृदय को दयालु बनाना है,तभी हमारा आंतरिक जीवन धर्ममय बनेगा।आज लोग धर्म के नाम का प्रदर्शन करने के बजाए अपनी आत्मा से मैत्री करे उसका आदर करें।


म सा ने कहा धर्म करता धन बढे धर्म बढता मन बढे, धर्म को परम मित्र बना लो धर्म हमे बचा लेता पर हमने धर्म के लिए क्या किया,क्या धर्म प्रवचन सुनना सुनाना लिखना रह गया क्या यही नशा है, धर्म को जूता चप्पल की जैसे नहीं समझे जब चाहे बदल लिया धर्म जगे तो सुख जगे।


इससे पहले श्री दिव्यदर्शन जी म सा ने भजन से कहा तेरे सुख एक दिशा तू भीतर आ तू भीतर आ इस संसार में सुखी कोन है?जो एक वर्ष तक सयंम पालता वो सुखी होता है।असली सुग्गा वितरागता में होता है वितरागी मध्यस्थ है किसी से कोई लेना देना नहीं रहता।हमें जिनशासन को आबाद करने की सोचना है।


म सा ने कहा राग द्वेष वाला वितरागी नहीं बन सकता मोह का अंधा क्या नहीं कर सकता,अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देना मां-बाप बनना,आज दिखावा रोकने के लिए उत्क्रांति की जरूरत है,जैन धर्म के अलावा सभी धर्मो के लिए जरूरी है।


महाबली श्री पराग श्रीजी म सा ने कहा जो व्यक्ति भाग्यशाली होगा वहीं जैन कूल चाहेगा,हमें अपना भाग्य बढ़ाना होगा तभी हम भाग्यशाली बनेंगे।हमें अपनी आत्मा को सही दिशा में ले जाने की तैयारी करनी चाहिए,हर परिस्थिति में रहना सीखना चाहिए चाहे अनुकल प्रतिकूल परिस्थिति हो। बच्चे मानते नहीं उनको मनाया जाता हे।


संचालन विजय ओस्तवाल ने करते हुए बताया आज की धर्म सभा में खिरकिया एम पी से श्री मधुर मुनि जी म सा के वीर भ्राता आशीष रत्ना समदडिया, बद्री प्रसाद पटेल, मोहन सोनी, विरेन्द्र राजपूत, बालेसर से संगीता गोतम बाफणा,भाटा पारा से अनिता उमेश टांटिया,राजनांद गांव से किशोर वैद,सूरत से वीर गांधी परिवार आदि उपस्थित थे।


संघ प्रवक्ता
नोरत मल बाबेल
साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।

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