‎प्रेम करने वाला हर स्थिति में आनंदित रहता है – श्रेयांशप्रभ सागर जी‎

‎प्रेम करने वाला हर स्थिति में आनंदित रहता है – श्रेयांशप्रभ सागर जी‎




‎राजनांदगाव(अमर छत्तीसगढ़) 17अगस्त। परम पूज्य खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा.,खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा कि प्रेम करने वाला व्यक्ति हमेशा आनंदित रहता है, चाहे वह किसी भी परिस्थिति में हो। उसके अनुसार काम हुआ तो ठीक, नहीं हुआ तो भी ठीक, वह हमेशा प्रेम में लीन रहता है। जबकि मोह करने वाला व्यक्ति उसके अनुसार काम नहीं हुआ तो वह क्रोध में आ जाता है।


‎ जैन बगीचा स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में उन्होंने कहा कि प्रेम करने वाला व्यक्ति जहां जो हो रहा है उससे सहमत होता है। प्रेम को बांधकर नहीं रखा जा सकता। मोह और राग हमेशा छोटों पर होता है।

उन्होंने कहा कि आप जिसकी प्रशंसा कर रहे हैं, उससे मोह टूटने पर आप उसकी बुराई करने लग जाते हैं। यह कभी प्रेम नहीं हो सकता। यह मोह है जिसके कारण आपकी प्रतिक्रिया ऐसी होती है। मोह टूटने पर वह क्रोध में बदल जाता है जबकि प्रेम नहीं बदलता वह प्रेम ही रहता है। परमात्मा सभी से प्रेम करते हैं।


‎ मुनिश्री ने कहा कि परमात्मा का जीवन हमारे लिए एक संदेश है। वे सहज, सरल और दयावान हैं। वे सभी कषायों से दूर हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास कुछ भी नहीं है और जो है उसका हमें अहंकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि परमात्मा की नजरों में वह तुच्छ है। ज्ञान का अहंकार करने वाले बहुत कम है लेकिन यदि वे अहंकार करते हैं तो वह ज्ञान – ज्ञान नहीं है। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा नने दी।

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