राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 21 अगस्त। खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने आज यहां कहा कि हमें किसी भी धर्म या व्यक्ति की असाधना करने का अधिकार नहीं है। हमें किसी को गलत कहने का कोई हक नहीं है। किसी भी धर्म का अपमान मत करो। जब तक किसी चीज का ज्ञान नहीं है तब तक उस संबंध में टिप्पणी मत करो।
जैन बगीचा स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन की श्रृंखला में श्रेयांश मुनि ने कहा कि दूसरे धर्म के साधु संतों ने भी मोक्ष प्राप्त किया है। आपको अपने ऊपर तथा अपने ज्ञान के ऊपर घमंड नहीं करना चाहिए।
ज्ञानी कभी नहीं बोलता कि मैं ज्ञानी हूं यदि वह ऐसा बोलता है तो फिर वह ज्ञानी कैसा! त्यागी कभी नहीं बोलना कि मैं त्यागी हूं। यदि उसने ऐसा कहा तो फिर उसके त्याग का क्या मतलब! मुनि श्री ने कहा कि जहां जरूरत है, वहीं कुछ कहो।
ज्ञान और त्याग कोई डिग्री नहीं है जिसका प्रदर्शन करो।गुणी व्यक्ति कभी शोबाजी नहीं करता। उन्होंने कहा कि बिना मांगे दी गई सलाह की कोई कीमत नहीं होती।
मुनि श्री श्रेयांशप्रभ ने कहा कि कोई भी धर्म हो उसके बारे में कुछ मत बोलो। यदि आपको समझ में नहीं आ रहा हो तो मत बोलो और समझने की कोशिश करो। उन्होंने कहा कि सच कभी बदलता नहीं है। किसी के मानने या ना मानने से कुछ नहीं होता, सत्य अपनी जगह अडिग रहता है।
इस दुनिया में सब कुछ हो सकता है। जो भी मनुष्य की कल्पना शक्ति है वे सभी पृथ्वी में मौजूद है। आप यह मत कहिए कि कोई भी चीज दुनिया में नहीं है, बल्कि आप यह कहिए कि आपने ऐसी चीज अब तक देखी नहीं है। यह जानकारी मिडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।

