अतीत नहीं होता तो आज आप जो हैं, वह बन नहीं पाते -श्रेयांशप्रभ जी‎

अतीत नहीं होता तो आज आप जो हैं, वह बन नहीं पाते -श्रेयांशप्रभ जी‎



‎राजनांदगांव(अमर छत्तीसगढ़) 26 अगस्त। जैन मुनि श्रेयांश प्रभ सागर जी ने कहा कि अतीत नहीं होता तो आज आप जो हैं,वह नहीं होते। अतीत से हमको बहुत कुछ सीखने को मिलता है। डर हमारे विचारों पर बैठ जाने की वजह से हम कोई काम सही ढंग से कर नहीं पाते। प्रेम करने के लिए सामने एक व्यक्ति की जरूरत होती है जबकि पछतावा के लिए किसी की जरूरत नहीं होती।
‎ मुनि श्री श्रेयांशप्रभ सागर जी ने ज्ञानवल्लभ भवन में अपने चतुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में कहा कि पुराना जो है उसे छोड़ना पड़ता है किन्तु जो आपके आगे बढ़ाने में सहायक रहा हो उसे आप कभी मत छोड़ो। आप क्या नहीं कर रहे हो वह तो आप देख ही लेते हो किंतु आप क्या कर सकते हो, इसे आप देख नहीं पाते। उन्होंने कहा कि सोचना बुरा नहीं है किंतु पछतावे का भाव सदैव रहना चाहिए। अतीत हमारे लिए बुरा सपना होता है और बुरा ही लोग याद रखते हैं। यदि अतीत नहीं होता तो हम अपने में सुधार कैसे लाते।


‎ मुनि श्री श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा कि क्यों हम पुरानी बातों को याद कर दुखी होते हैं। जब हम पुराने मकान को छोड़कर नये मकान में जाते हैं तो पुराने मकान की ईट-पत्थर को साथ में नहीं लाते, उन्हें वहीं छोड़ देते हैं। ठीक इसी तरह पुरानी बातों को वहीं छोड़ दो।

गलतियां तो हर किसी से होती है परंतु गलतियों को सुधारो,नाकि उस पर दुख व्यक्त करते बैठे रहो। अतीत को अपने भविष्य में रोड़ा बनाने वाला मत बनाओ। गलतियों को मानना अच्छी बात है किंतु गलतियों को लेकर बैठना अच्छी बात नहीं। पुरानी चीजों को भूलने का प्रयास कभी ना करो।
‎ मुनिश्री ने कहा कि घर छोड़कर तो आप भाग सकते हो किंतु खुद को छोड़कर कैसे भागोगे।

उन्होंने कहा कि मत भागो, समस्या का सामना करो और अपने में सुधार करो। आप अपने अतीत से सीखकर अपने में सुधार ला सकते हैं। यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।

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