बदलाव के बिना जीवन आगे नहीं बढ़ता, आत्मकल्याण के लिए दिशा बदलना जरूरी : साध्वी मंजुलाश्रीजी

बदलाव के बिना जीवन आगे नहीं बढ़ता, आत्मकल्याण के लिए दिशा बदलना जरूरी : साध्वी मंजुलाश्रीजी

रायपुर(अमर छत्तीसगढ़) 30 अगस्त । आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास 2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशल जैन दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन करते हुए साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने रविवार को जीवन में बदलाव और आत्मचिंतन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन में परिवर्तन तभी सार्थक है, जब वह हमारे विचारों, व्यवहार और भावों में दिखाई दे। केवल परिस्थितियां बदलने की इच्छा रखने से जीवन नहीं बदलता, इसके लिए स्वयं को बदलने का प्रयास करना पड़ता है।

साध्वीश्री ने कहा कि कई बार कोई घटना या किसी की कही हुई बात हमारे मन को भीतर तक प्रभावित करती है। यही चोट हमें अपने बारे में सोचने और बदलाव की ओर बढ़ने का अवसर देती है। व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ने के लिए लगातार मेहनत करता है, लेकिन उसका अधिकतर पुरुषार्थ धन और सुविधाएं बढ़ाने में लगा रहता है। हमें यह विचार करना चाहिए कि जिस आत्मा के कारण यह मनुष्य जीवन मिला है, उसके लिए हमने कितना प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन मिलना अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को यह तय करना चाहिए कि उसके जीवन का वास्तविक लक्ष्य क्या है। लक्ष्य स्पष्ट होगा तो पुरुषार्थ भी सही दिशा में होगा और जीवन भटकने से बचेगा।

साध्वीश्री ने शिल्पकार और कुम्हार का उदाहरण देते हुए कहा कि जब पत्थर किसी कुशल शिल्पकार के हाथ में आता है तो वही पत्थर सुंदर प्रतिमा का रूप ले लेता है। मिट्टी को अच्छा कुम्हार मिल जाए तो वह भी आकर्षक आकार ग्रहण कर लेती है। इसी तरह मनुष्य के भीतर दृढ़ इच्छा शक्ति और सही दिशा आ जाए तो उसका जीवन भी पूरी तरह बदल सकता है।

उन्होंने कहा कि हम अक्सर जीवन में बदलाव नहीं आने की शिकायत करते हैं और कहते हैं कि सब कुछ पहले जैसा ही चल रहा है। लेकिन बदलाव की शुरुआत बाहर से नहीं, स्वयं से करनी होगी। जब सोच बदलेगी तो व्यवहार बदलेगा और जब व्यवहार बदलेगा तो जीवन की दिशा भी बदलने लगेगी।

साध्वीश्री ने कहा कि आत्मकल्याण के लिए केवल इच्छा करना पर्याप्त नहीं है। इच्छा को संकल्प में और संकल्प को पुरुषार्थ में बदलना होगा। जो व्यक्ति स्वयं को बदलने का साहस करता है, वही अपने जीवन को नई दिशा देने में सफल होता है।

इस अवसर पर श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, ट्रस्टी नरेश बैदूमुथा, राजेंद्र गोलछा एवं उज्ज्वल झाबक तथा आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास समिति के अध्यक्ष बसंत लोढ़ा, महासचिव मुकेश निमाणी एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

खेल के साथ संस्कार और सीख का हुआ संगम

आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं आयोजन समिति की ओर से दादाबाड़ी परिसर में आयोजित संस्कारम शिविर में बच्चों के लिए विशेष गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों को रूबिक क्यूब सिखाया गया। इसके लिए रूबिक क्यूब की विशेष टीम ने बच्चों को प्रशिक्षण दिया।

शिविर में बच्चों ने उत्साह के साथ रूबिक क्यूब सीखने में भाग लिया। खेल और मनोरंजन के माध्यम से बच्चों में एकाग्रता, धैर्य, रचनात्मक सोच और समस्या का समाधान करने की क्षमता विकसित करने का प्रयास किया गया।

समिति ने बताया कि संस्कारम शिविर का उद्देश्य बच्चों को धर्म और जैन संस्कारों से जोड़ने के साथ उनके व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान देना है। शिविर में खेलों के माध्यम से संस्कार, प्रेरणादायक कहानियां और विभिन्न शिक्षाप्रद गतिविधियां आयोजित की गईं। प्रतिभागी बच्चों के लिए आकर्षक एवं उपयोगी उपहार भी रखे गए।

यह आयोजन परम पूज्य कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महोदया निपुणा श्रीजी म.सा. की सुशिष्या एवं प्रवचन प्रभाविका श्री मंजुला श्रीजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा एवं प्रेरणा में आयोजित किया जा रहा है।

श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति की ओर से बताया गया कि संस्कारम शिविर के माध्यम से बच्चों में धर्म, संस्कार, अनुशासन, रचनात्मकता और आत्मविश्वास के गुण विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। शिविर में बच्चों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।

अक्षयनिधि, समवसरण और कषायविजय तप की 15 दिवसीय आराधना 31 अगस्त से दादाबाड़ी में

आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत दादाबाड़ी में अक्षयनिधि, समवसरण एवं कषायविजय तप के तपस्वियों के लिए 15 दिवसीय विशेष आराधना का आयोजन किया जाएगा। यह धार्मिक आयोजन 31 अगस्त से प्रारंभ होगा।

आयोजन के दौरान तपस्वियों के लिए देववंदन, एकासना सहित विभिन्न धार्मिक आराधनाएं कराई जाएंगी। 15 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में तपस्वी श्रद्धा और संयम के साथ आराधना करेंगे।

आयोजन समिति के अनुसार तप के माध्यम से आत्मसंयम, त्याग और साधना की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। तपस्वियों के साथ श्रीसंघ के श्रद्धालु भी विभिन्न आराधनाओं में सहभागी बनकर धर्मलाभ प्राप्त करेंगे।

यह आयोजन परम पूज्य कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महोदया निपुणा श्रीजी म.सा. की सुशिष्या एवं प्रवचन प्रभाविका साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा एवं प्रेरणा में आयोजित किया जाएगा।

श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति ने समाज के श्रद्धालुओं से इस 15 दिवसीय आराधना में सहभागी बनकर तप, संयम और धर्म साधना का लाभ लेने का आग्रह किया है।

बेटियों को मिली आत्मविश्वास और आत्मरक्षा की सीख, दादाबाड़ी में हुआ विशेष सेमिनार

बेटियों की उच्च शिक्षा के साथ उनकी सुरक्षा, संस्कार, आत्मविश्वास और आत्मरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रविवार को दादाबाड़ी, एम.जी. रोड रायपुर में एक दिवसीय प्रेरणादायी सेमिनार का आयोजन किया गया। “जीना इसी का नाम है” विषय पर आयोजित इस सेमिनार में बेटियों और युवतियों से जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद किया गया।

नागपुर के प्रेरक वक्ता श्री प्रफुल्ल जी पारख ने सेमिनार में दोस्ती, रिश्ते और ब्रेकअप से जुड़ी भावनाओं को समझने, सही निर्णय लेने, आत्मसम्मान बनाए रखने, आत्मरक्षा के प्रति जागरूक रहने तथा अपने सपनों और भविष्य को लेकर सकारात्मक सोच रखने जैसे विषयों पर चर्चा की।

उन्होंने बेटियों के साथ संवाद करते हुए कहा कि जीवन में आने वाली परिस्थितियों से घबराने के बजाय उन्हें समझदारी और आत्मविश्वास के साथ सामना करना चाहिए। अपनी पहचान और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत बनाना भी व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

आयोजकों ने कहा कि बेटियों को केवल उच्च शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें सुरक्षा, संस्कार, आत्मविश्वास और आत्मरक्षा के साथ वर्तमान समय की गंभीर समस्याओं के प्रति सजग बनाना भी सामूहिक जिम्मेदारी है। सेमिनार में बेटियों की अनकही भावनाओं और उनके सवालों पर खुलकर चर्चा की गई।

यह कार्यक्रम परम पूज्य साध्वी श्री निपुणा श्रीजी म.सा. की सुशिष्या एवं प्रवचन प्रभाविका परम पूज्य साध्वी श्री मंजुला श्रीजी म.सा. आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में आयोजित हुआ।

सेमिनार का आयोजन श्री महाकौशल जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ द्वारा तथा संयोजन श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट, रायपुर के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में बेटियों और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।

आयोजकों ने कहा कि हर बेटी में आगे बढ़ने की क्षमता है। जरूरत है उसे अवसर के साथ विश्वास, सही मार्गदर्शन और अपनापन देने की। ऐसे संवाद बेटियों को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करने और उन्हें आत्मनिर्भर एवं आत्मविश्वासी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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